वैश्विक अंतरिक्ष परिवर्तन में भारत सबसे आगे: निधि खरे

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नई दिल्ली, 08 मई । भारत वैश्विक अंतरिक्ष बदलाव में सबसे आगे है और अंतरिक्ष उद्योग में नवाचार तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी के एक प्रमुख केंद्र के रूप में लगातार उभर रहा है।

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ‘अंतरिक्ष प्रणालियों और संचालन’ पर आयोजित बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने मानकों को आगे बढ़ाने में वैश्विक सहयोग के महत्व और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मानक इकोसिस्टम को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारत के लिए इस बैठक की मेजबानी करना अत्यंत गौरव का विषय है क्योकि हम वैश्विक अंतरिक्ष परिवर्तन के अग्रणी के रूप में खड़े हैं।”

निधि खरे ने कहा कि महत्वपूर्ण सुधारों और आईएन-एसपीएसीई की स्थापना के माध्यम से भारत सरकार ने उभरते हुए अंतरिक्ष केंद्र की नींव रखी है, जहां स्टार्टअप और स्थापित उद्योग समान रूप से फल-फूल सकते हैं। इस तरह के वैश्विक सहयोग और विशेषज्ञता द्वारा विकसित मानक मानवता के लिए अंतरिक्ष को सुरक्षित, सतत और समावेशी बनाने में मदद करेंगे।

इस अवसर पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के महानिदेशक संजय गर्ग ने अंतरिक्ष क्षेत्र में गुणवत्ता, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करने में मानकीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बीआईएस अंतरिक्ष उद्योग की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय मानकों को अंतरराष्ट्रीय ढांचों के अनुरूप बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

वहीं, डॉ. पवन गोयनका (अध्यक्ष, आईएन-एसपीएसीई) ने नीतिगत सुधारों और निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रेरित भारत के अंतरिक्ष इकोसिस्टम के परिवर्तनकारी विकास पर बल दिया। उन्होंने नवाचार को सक्षम करने, उद्योग के विश्वास को बढ़ाने और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत के एकीकरण को सुविधाजनक बनाने में मजबूत मानकों के महत्व को रेखांकित किया।

इस कार्यक्रम में 13 देशों के 131 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें विभिन्न राष्ट्रीय मानक निकायों के प्रतिनिधि, भारत की आईएसआरओ सहित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के विशेषज्ञ, अंतरिक्ष उद्योग और शिक्षाविद् शामिल थे।