पंजाब के जालंधर में श्री गुरु नानक देव जी की जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले नगर कीर्तन को लेकर जिला उपायुक्त ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। डीसी हिमांशु अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि नगर कीर्तन के मार्ग और धार्मिक समारोहों के स्थानों पर हर प्रकार की शराब और मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। उनका यह निर्णय धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत आता है।
यह आदेश 12 नवंबर 2024 को लागू होगा, जब जालंधर में नगर कीर्तन और अन्य धार्मिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इस दिन को विशेष मान्यता दी जाएगी, जिससे लोगों को अपने धार्मिक कर्तव्यों को निभाने में कोई बाधा न आए। इसके अतिरिक्त, सभी स्कूलों और कॉलेजों में आधा दिन की छुट्टियों की घोषणा की गई है, जिससे छात्र भी इस शुभ अवसर का हिस्सा बन सकें और अपने परिवार के साथ इस धार्मिक आयोजन में शामिल हो सकें।
नगर कीर्तन की परंपरा को ध्यान में रखते हुए, डीसी अग्रवाल ने स्थानीय प्रशासन से भी आग्रह किया है कि वे इस अवसर पर सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करें। सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करने और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पुलिस बल को तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही, जिले के विभिन्न धार्मिक संगठनों से भी संपर्क करके उन्हें व्यवस्था बनाए रखने में सहायता करने का अनुरोध किया गया है।
इस आयोजन के दौरान दुर्व्यवहार या अनुशासनहीनता की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा और निगरानी योजनाएं तैयार कर ली हैं। जिलाधीश ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सभी नागरिकों को संगठित और सुसंगत तरीके से इस धार्मिक अवसर का लाभ उठाने का मौका मिले।
जालंधर में गुरु नानक देव जी की जयंती का यह नगर कीर्तन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता और भाईचारे को भी बढ़ावा देने का एक माध्यम है। इस अवसर पर लाखों लोग अपने श्रद्धा भाव के साथ एकत्रित होकर भक्तिपूर्ण माहौल में शामिल होते हैं। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल धार्मिक भावनाओं को बल मिलता है, बल्कि स्थानीय समुदाय के बीच आपसी सामंजस्य और सद्भावना भी मजबूत होती है।
इस निषेधाज्ञा के माध्यम से प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान किया जाए और किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। सभी लोग इस पर्व को मिलकर मनाएं और अपनी धार्मिक आस्था को प्रदर्शित करें।
