जींद, 12 मई । सीटू, किसान सभा, इंटक व रिटायर्ड कर्मचारी संघ के आह्वान पर मजदूर संगठनों ने मंगलवार को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति हरियाणा, मुख्यमंत्री व श्रम मंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। विभिन्न जन संगठनों के कार्यकर्ता, मजदूर, किसानों ने अंबेडकर चौक रानी तालाब पर लेबर कोड्स की प्रतियां भी फूंकी। ज्ञापन के माध्यम से चारों लेबर कोड्स को रद्द करने की मांग की गई।
प्रदर्शन से पहले रोष सभा को संबोधित करते हुए सीटू जिला अध्यक्ष रमेश चंद्र और सचिव संदीप जाजवान ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा घोषित 15,200 रुपये का न्यूनतम वेतन ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। न्यूनतम वेतन कानूनन हर पांच साल में रिवाइज होना चाहिए। जो 2020 में होना था। लेकिन सरकार ने इसमें छह साल की देरी की। उन्होंने मांग की कि पानीपत में 29 दिसंबर 2025 को गठित कमेटी द्वारा सर्वसम्मति से पारित 23,196 रुपये के प्रस्ताव को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए। साथ ही भट्ठा मजदूरों को भी इस नोटिफिकेशन में शामिल किया जाए। किसान सभा के राज्य अध्यक्ष मास्टर बलबीर सिंह, इंटक नेता धर्मबीर लोहान ने मानेसर में ऑटोमोबाइल और गारमेंट्स मजदूरों पर हुए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की।
उन्होंने कहा कि शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे मजदूरों को जेल भेजना और धारा 163 लागू करना लोकतंत्र की हत्या है। गिरफ्तार 55 मजदूरों को तुरंत रिहा करने और घायलों के मुफ्त इलाज की मांग की गई। उन्होंने मांग की कि राज्य में न्यूनतम वेतन 23,196 रुपये सुनिश्चित किया जाए। मानेसर से धारा 163 हटाई जाए और पुलिस दमन बंद हो। औद्योगिक दुर्घटनाओं में मृतक मजदूरों के परिजनों को 50 लाख व घायलों को 10 लाख रुपये मुआवजा मिले। मजदूरों को डबल रेट पर ओवर टाइम और सरकारी रेट पर एलपीजी गैस दी जाए। शहरी सफाई कर्मचारियों व अग्निशमन कर्मचारियों की मांगों का तुरंत समाधान हो। मजदूर विरोधी लेबर कोड्स वापस लिए जाएं। इस मौके पर सतबीर खरल, कपूर सिंह, विक्रम सिंह सहित अनेक कर्मचारी नेता मौजूद रहे।