प्रधानमंत्री मोदी ने सुभाषित साझा कर भारतीय सेना के शौर्य को किया नमन

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प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया- स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि | धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते।। इस सुभाषित का अर्थ है कि अपने कर्तव्य का बोध होने पर व्यक्ति के मन में किसी भी प्रकार की दुविधा या भय नही होना चाहिए, क्योकि न्याय की वेदी पर धर्म और मर्यादा की रक्षा हेतु किया गया संघर्ष ही एक योद्धा के लिए आत्म-कल्याण का सर्वोतम और सर्वाधिक गौरवशाली मार्ग है।