चिकित्सा निदेशक पेश होकर बताए कि आदेश के बावजूद संविदाकर्मी की सेवा जारी क्यों नहीं रही-हाईकोर्ट

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जयपुर, 24 अक्टूबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बाद भी मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना के तहत लगे संविदा पर लगे लैब सहायक की सेवाएं जारी न रखने को गंभीर माना है। इसके साथ ही अदालत ने चिकित्सा निदेशक को 28 अक्टूबर को पेश होकर अपना जवाब देने को कहा है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश गुड्डी सैनी की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

अवमानना याचिका में अधिवक्ता सुनील कुमार सिंगोदिया ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता जमवारामगढ़ के तला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जयपुर-प्रथम में लैब सहायक के पद पर संविदा पर कार्यरत थी। इस दौरान साल 2026-27 के लिए योजना में संविदा कर्मियों की वित्तीय मंजूरी नहीं मिलने पर 9 मार्च को आदेश जारी कर उसकी सेवा खत्म कर दी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने पर अदालत ने गत 10 अप्रैल 2026 को विभाग को निर्देश दिए थे कि यदि मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना आगे जारी रहे तो याचिकाकर्ता की सेवा जारी रखी जाए। इसके साथ ही उसे किसी अन्य संविदाकर्मी से नहीं बदला जाए। अवमानना याचिका में कहा गया कि मौजूदा समय में योजना जारी रहने के बाद भी उसे अदालती आदेश की पालना में कार्य पर वापस नहीं लिया। इसलिए याचिकाकर्ता की सेवा जारी रखना सुनिश्चित करते हुए अवमानना करने वाले अफसरों को दंडित किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने चिकित्सा निदेशक को पेश होकर इस संबंध में अपना जवाब देने को कहा है।