भीमताल क्षेत्र के पांच गांवों में गांजे की संदिग्ध खेती की जांच कराने की मांग

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नैनीताल, 24 अक्टूबर । नैनीताल जनपद भीमताल क्षेत्र के सलड़ी, घाटीगाड़, खैरोला पांडे, खैरोला पंत, खड़की और चनौतिया गांवों में गांजे की संदिग्ध अवैध खेती, बिक्री एवं वितरण की जांच कराने की मांग की गयी है। इस संबंध में नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी को संबोधित एक गोपनीय शिकायत में संबंधित क्षेत्रों में पुलिस से निरीक्षण एवं सत्यापन कराने का अनुरोध किया गया है।

गुमनाम शिकायतकर्ता ने पत्र में कहा है कि सलड़ी, घाटीगाड़़ क्षेत्र विस्तृत है और आसपास के गांवों में गांजे की संदिग्ध खेती तथा इससे जुड़ी गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता है। ऐसी गतिविधियों से युवाओं के प्रभावित होने की आशंका भी जतायी गयी है।

पत्र में पुलिस प्रशासन से किसी एक स्थान तक जांच सीमित रखने के बजाय सभी संदर्भित गांवों और आसपास के क्षेत्रों में गोपनीय जांच कराने का अनुरोध किया गया है। साथ ही, अवैध गतिविधियों की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने तथा शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने की मांग की गयी है।

बताया गया है कि इन गांवों में इन दिनों बाहरी लोग आकर भांग के पेड़ों से गांजा व चरस तैयार कर ले जा रहे हैं और स्थानीय लोगों को इसके बदले में स्मैक दे कर जा रहे हैं। जिससे दो तरह से क्षेत्रीय लोगों का नुकसान हो रहा है, और युवा पीढ़ी नशे के चंगुल में फंस रही है।

उल्लेखनीय है कि भांग पहाड़वासियों के भोजन का परंपरागत तौर पर अविभाज्य हिस्सा रहा है। भांग के बीजों का पीसकर मसाले के रूप में उपयोग होता है, और चटनी बनती है।

सर्दियों के मौसम में इसका बहुतायत से प्रयोग होता है। साथ ही इसके तने का उपयोग रस्सी बनाने के लिये होता है। लेकिन इसकी आढ़ में कुछ लोग नशे के लिये इसकी अवैध तरीके से खेती कर रहे हैं और इसके पत्तों से नशे के लिये प्रयुक्तगांजा और चरस बना रहे हैं। जिन पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।