नई दिल्ली, 06 अक्टूबर । दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय को उच्चतम न्यायालय के जज के रूप में नियुक्ति के बाद मंगलवार को भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि, उन्होंने हकदार वादियों को न्याय दिलाने के लिए कानून को न्याय की दिशा में थोड़ा लचीला बनाने की कोशिश की। ऐसा कर पाना उनके लिए एक वरदान रहा है। उन्होंने आज ही उच्चतम न्यायालय के जज के रूप में शपथ भी ग्रहण की।
दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित विदाई समारोह में उपाध्याय ने कहा कि दूसरे जजों की तरह, उन्हें भी ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ा जब कानून सही नतीजा नहीं दिला पा रहा था और न्याय से अलग-थलग लग रहा था। ऐसी स्थितियों में उन्होंने हकदार वादियों को न्याय दिलाने के लिए कानून को न्याय की दिशा में थोड़ा लचीला बनाने की कोशिश की। ऐसा कर पाना उनके लिए एक वरदान रहा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने डीके उपाध्याय के पदोन्नत होने के बाद न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे को दिल्ली उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। साम्ब्रे ने भी आज कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाल लिया।
डीके उपाध्याय ने लखनऊ यूनिर्विसटी से कानून की डिग्री हासिल की है। उसके बाद उन्होंने 1991 से वकालत शुरू की। दीवानी और संवैधानिक मामलों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे मई 2007 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता (चीफ स्टैंडिंग काउंसल) नियुक्त किए गए।नवंबर 2011 में वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जज नियुक्त किए गए। जुलाई 2023 में बांबे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए। उसके बाद जनवरी 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए।
