आमा पंडुम की परंपरा निर्वहन के बाद आम का उपयाेग करते हैं, बस्तर के ग्रामीण
जगदलपुर, 16 अप्रैल (हि.स.)। बस्तर संभाग के लगभग सभी गांव में आमा पंडुम मनाने की परंपरा है, बस्तर के ग्रामीण प्रकृति के भी पूजक होते हैं और आम का फल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करता है। इसलिए ग्रामीण पेड़ों की पूजा के साथ ही अपने ग्राम देवी-देवताओं के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। बस्तर में आमा पंडुम से पूर्व पेड़ों से आम तोड़ना वर्जित है। यदि अनजाने में कोई ऐसा करता है तो उसपर अर्थ दंड लगाने का भी प्रावधान है।
ग्रामीण आमा पंडुम मनाने के लिए बागमुंडी पनेडा, किलेपाल समेत आस-पास के इलाके के ग्रामीण जगदलपुर-बीजापुर नेशनल हाईवे 63 पर अस्थाई नाका लगाकर राहगीरों से चंदा वसूलते दिखे। बदलते समय के साथ बस्तर की परंपराओं में भी विकृति देखने के लिए मिल रहा है, अस्थाई नाका लगाकर राहगीरों से चंदा वसूली भी इसी में से एक है। उल्लेखनीय है कि बस्तर के ग्रामीणाें में गजब का अनुशासन है, आमा पंडुम की पूजा से पहले गांव का कोई भी व्यक्ति न तो आम तोड़ता है और न ही तोड़ने देता है। अर्थात आम की फसल के तैयार हाेने के बाद पहले अपने अराध्य देवी-देवता काे अर्पण के बाद ही इसका उपयाेग करने की परंपरा का निर्वहन आज भी जारी है।
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