लुधियाना में मंदिर से 40 किलो चांदी की चोरी: गहनों के गायब होने से कमेटी आक्रोशित!

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पंजाब के लुधियाना में स्थित प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर से बीती रात एक चौंकाने वाली चोरी की घटना सामने आई है। चोरों ने मंदिर के अंदर घुसकर भगवान की मूर्तियों पर चढ़ाए गए लाखों के चांदी के गहनों पर हाथ साफ कर लिया। यह घटना शहर के बीआरएस नगर और रणधीर सिंह नगर क्षेत्र में हुई, जहां रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। मंदिर के पुजारी द्वारा सुबह जब मंदिर का दरवाजा खोला गया, तब उन्हें मूर्तियों से गहने गायब मिले। घटना की जानकारी मिलते ही मंदिर की कमेटी ने तुरंत पुलिस को सूचित किया, जिसने मामले की जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, चोरों ने मुख्य गेट फांदकर मंदिर के अंदर प्रवेश किया और लगभग 40 किलो चांदी के गहने चुरा लिए। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष, अशोक सच्चर ने बताया कि चोरी गए गहनों की कीमत लगभग 30 से 40 लाख रुपये के आसपास है। चोरों ने अनजाने में मंदिर को निशाना बनाया, जो कि बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि मोहल्ले में चौकीदार की व्यवस्था के बावजूद, अपराधियों ने चौराहे पर स्थित इस पवित्र स्थल को नहीं बख्शा।

इस घटना के बाद, मंदिर कमेटी के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने मिलकर एक बैठक की, जिसमें चोरी की सख्त निंदा की गई और प्रशासन के प्रति रोष व्यक्त किया गया। सभी ने मांग की कि पुलिस प्रशासन इस मामले की गहन जांच कराए और चोरों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। इसके अलावा, अध्यक्ष अशोक सच्चर ने स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इस घटना से श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

पुलिस ने भी इस मामले की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कदम उठाए हैं। डीसीपी शुभम अग्रवाल ने कहा कि पुलिस टीम ने घटनास्थल से जुड़े सभी संभावित सबूतों का अध्ययन करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का भी गहनता से परीक्षण किया जा रहा है ताकि चोरों की पहचान की जा सके। पुलिस के अनुसार, जल्द ही इस वारदात में शामिल अज्ञात लोगों को पकड़ लिया जाएगा और उन्हें सजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

इस घटना ने स्थानीय समुदाय में चिंता और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। अब लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए त्वरित कार्रवाई करेगा, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।