जरूरतमंदों के लिए सामुदायिक रसोई चलाने का आदेश देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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नई दिल्ली, 22 फरवरी (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में जरूरतमंदों को भोजन करवाने के लिए सामुदायिक रसोई चलाने का आदेश देने से इनकार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और दूसरी योजनाओं के तहत पहले ही लोगों को अनाज दिया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर केंद्र और राज्य सरकारों को जरूरी लगे तो वह सामुदायिक रसोई चलाने पर भी विचार कर सकते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता अनून धवन, ईशान सिंह और कुंजन सिंह ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से वकील फुजैल अहमद अयूबी ने कहा था कि भूख और कुपोषण की वजह से पांच साल से कम उम्र के कई बच्चों की मौत हो जाती है।

याचिका में केंद्र सरकार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे से बाहर लोगों के लिए राष्ट्रीय खाद्य ग्रिड बनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने और भूख से होने वाली मौतों को कम करने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएलएसए) को योजना तैयार करने का आदेश देने की मांग की गई थी। याचिका में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, झारखंड और दिल्ली में सरकार के वित्तपोषण से चलाई जा रही सामुदायिक रसोई का हवाला दिया गया था। इन सामुदायिक रसोई में लोगों को रियायती दरों पर खाना दिया जाता है।