गुरदासपुर में भाई लालो चौक पर विवाद: विधायक-प्रशासन आमने-सामने, ADC ने NOC मांगा।

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गुरदासपुर के भाई लालो चौक के कार्य को लेकर जिला प्रशासन और स्थानीय विधायक के बीच ताजा विवाद ने तूल पकड़ा है। मामला तब गरमाया जब शनिवार को प्रशासन ने चौक के निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे को भरने का प्रयास किया, जिसका स्थानीय निवासियों ने विरोध किया। विधायक बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा एवं नगर कौंसिल के प्रधान एडवोकेट बलजीत सिंह पाहड़ा ने लोगों के साथ मिलकर उस गड्ढे से मिट्टी निकालकर कार्य पुनः आरंभ कर दिया। यह घटना न केवल प्रशासनिक स्तर पर तनाव बढ़ा रही है, बल्कि स्थानीय जनता का भी आक्रोश दिखा रही है।

भाई लालो चौक के निर्माण विवाद का मुख्य कारण एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) है। जिला प्रशासन का कहना है कि उनके पास कोई एनओसी नहीं है, जबकि नगर कौंसिल और विधायक कार्य के लिए आवश्यक सभी एनओसी प्राप्त होने का दावा कर रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि 15.40 लाख रुपये का टेंडर पास किया जा चुका है। जानकारी के अनुसार, लगभग एक महीने पहले इस चौक के लिए गड्ढा खोदा गया था, लेकिन अब जिला प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की है।

इस विवाद के बीच विधायक पाहड़ा ने जाकर स्थिति का जायजा लिया, जिसमें उन्होंने यह उल्लेख किया कि उनकी पत्नी के चाचा का दाह संस्कार चल रहा था, लेकिन उन्होंने सूचना पाई कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में चौक का निर्माण रोक रहा है। इस सूचना ने उन्हें संस्कार छोड़कर मौके पर पहुंचने को मजबूर कर दिया। उनका कहना है कि स्थानीय लोग लंबे समय से चौक के निर्माण की मांग कर रहे थे और उनकी आवाज़ को प्रशासन के कान में डालने की आवश्यकता है।

वहीं, नगर कौंसिल के प्रधान बलजीत सिंह पाहड़ा ने कहा कि सभी आवश्यक एनओसी प्राप्त करने के बाद ही 15.40 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था। लेकिन बावजूद इसके, विवाद बढ़ता गया और स्थानीय लोग चौक के रास्ते को चारों ओर से जाम कर दिया, जिससे शहर के विभिन्न हिस्सों में交通 रुक गया। इससे लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।

जब इस मामले पर डीसी उमा शंकर गुप्ता से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह मामला एडीसी जनरल द्वारा देखा जा रहा है। एडीसी जनरल हरजिंदर सिंह का कहना था कि नगर कौंसिल के पास चौक निर्माण के लिए एनओसी नहीं है। यदि एनओसी है, तो उन्हें दिखाने को कहा गया है। यह विवाद न केवल प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी को दर्शाता है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। अब देखना यह होगा कि यह मामला आखिरकार किस दिशा में जाता है और प्रशासन और विधायक इस विवाद को किस तरह सुलझाते हैं।