श्री देवी तालाब मंदिर में छठ पूजा की भीड़, भक्तों की भारी मौजूदगी और सख्त सुरक्षा।

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पंजाब के जालंधर स्थित शक्ति पीठ श्री देवी तालाब मंदिर में आज छठ पूजा के अंतिम दिन भारी संख्या में भक्तों का जमावड़ा देखने को मिला है। लोग पूजा के लिए आवश्यक सामग्री से भरी टोकरियां अपने सिर पर रखकर मंदिर पहुंचे हैं और मां छठी की भक्ति में लीन हैं। चार दिनों तक संचालित इस छठ पूजा का पारण आज पूरा हुआ और साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास भी समाप्त हो गया। सुबह से ही भक्तगण तालाब के किनारे पूजा कर रहे हैं। इस धार्मिक आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने कड़े इंतजाम किए हैं।

छठ पूजा का यह पर्व बिहार का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। मां छठी को बच्चों की रक्षा करने वाली देवी के रूप में माना जाता है, जिसके कारण लोग संतान के सुख, दीर्घ जीवन और स्वस्थ जीवन की प्रार्थना के लिए इस पर्व का पालन करते हैं। मान्यता है कि इस पूजा का पालन करने से भक्तों के जीवन में समस्याओं का निराकरण होता है। भविष्य पुराण के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने अपने पुत्र सांब को सूर्य की पूजा करने का निर्देश दिया था, जिससे यह भी ज्ञात होता है कि सूर्य की महिमा कितनी महत्वपूर्ण है।

बिहार में यह कथा भी प्रचलित है कि देवी सीता, कुंती, और द्रौपदी जैसी महान विभूतियों ने भी छठ पूजा का व्रत किया था और इसके पुण्य के फल स्वरूप उनके सभी कष्ट दूर हो गए थे। यह प्राचीन आयोजन प्रति वर्ष श्रद्धा के साथ आयोजित किया जाता है, जहां लोग अपने जीवन में सूर्य के योगदान का आभार व्यक्त करते हैं। वेदों में भी सूर्य को एक प्रमुख देवता माना गया है और इसके प्रति श्रद्धा दिखाने का यह पर्व एक माध्यम है।

छठ पर्व, जिसे सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस पर्व का नाम “छठ” इसीलिए रखा गया है क्योंकि यह सूर्य के लिए नियत छहवीं तिथि पर मनाया जाता है। मां छठ को भगवान ब्रह्मा की मानसपुत्री के रूप में भी पूजा जाता है और यह विश्वास किया जाता है कि वह संतानों को जीवन देती हैं और उनकी रक्षा करती हैं। इस पर्व की ज्योतिषीय गणना इसे विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।

इस तरह का एकत्रण न केवल धार्मिक भावनाओं को मजबूत करता है, बल्कि समाज में एकता और सौहार्द को भी बढ़ावा देता है। आज के दिन भक्तों की आस्था और श्रद्धा की झलक साफ देखी जा सकती है, जो इस पर्व के महत्व को दर्शाती है।