कानपुर, 10 जून (हि.स.)। सीएसए के छात्राओं ने पांच दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण में उत्तराखण्ड में जैविक खेती को नजदीक से देखा। इसके साथ पतंजलि विश्वविद्यालय में आयुर्वेद पर किस तरह से कार्य हो रहा उसका भी अध्ययन किया।
चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय (सीएसए) के कुलपति डॉ डीआर सिंह के निर्देशन में छत्राओं का पांच दिवसीय एक शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी और एक सम्पूर्ण जैविक कृषि गांव बंगलो की खाण्डी नामक गांव में हुआ। यहां पर भ्रमण कराकर शत प्रतिशत जैविक खेती किसान कैसे कर रहे हैं के बारे मे विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई। किसानों द्वारा बताया गया वो यहां पर किसी भी तरह की रसायनिक खाद अथवा कीट नाशक दवाओं का प्रयोग नहीं करते। पेड़ पौधों की गिरी हुई पत्तियों को एकत्र कर जानवरों के बांधने की जगह बिछा देते हैं जिसके पश्चात पशुओं के गोबर, मलमूत्र का एक मिश्रण तैयार कर एक सप्ताह के बाद उस मिश्रण को उठा कर गड्ढे में डालने के कुछ महीनों बाद में पोषक तत्वों युक्त शानदार जैविक खाद तैयार हो जाती है।
छत्राओं को हरिद्वार में पतंजलि विश्वविद्यालय एवं पतंजलि योगपीठ, पतंजलि आयुर्वेद के साथ पतंजलि स्टोर का भ्रमण कराया गया। उन्होंने सभी पतंजलि उत्पादनों का अवलोकन किया। इसके उपरांत देहरादून स्थिति वन अनुसंधान केंद्र के साथ वन अनुसंधान के संग्राहालय को भी देखा। छात्रायें कैम्पटीफाल भी गई। हरिद्वार स्थिति हरि की पौड़ी में विश्व प्रसिद्ध सान्ध्य आरती को देखा। छत्राओं का भ्रमण कार्यक्रम डॉ एसएन सुनील पाण्डेय, डॉ विमलेश वर्मा के कुशल नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में डॉ सी एल मौर्या द्वारा शैक्षणिक भ्रमण को सफल बनाने में प्रतिदिन मार्गदर्शन किया जाता रहा।