— कीट रोग प्रबंधन पर प्रशिक्षण कर कृषकों को किया गया जागरुक
कानपुर, 10 जून (हि.स.)। खेत में कुल 17 तरह के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जबकि किसान सिर्फ यूरिया व डीएपी मतलब नाइट्रोजन व फॉस्फोरस का ही प्रयोग करते हैं। जिससे कि भूमियों में अन्य मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो गयी है। इससे उत्पादन दिन प्रतिदिन गिर रहा है। अतः कृषको को पहले अपनी मृदा का परीक्षण करवाकर फिर उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिये। यह बातें शुक्रवार को मृदा वैज्ञानिक डॉ खलील खान ने कही।
कृषि विज्ञान केंद्र दलीप नगर द्वारा आगामी खरीफ मौसम के मद्देनज़र मिट्टी परीक्षण का महत्व व मृदा नमूना लेने की विधि व खरीफ सब्जियों में बीज शोधन द्वारा रोग एवं कीट नियंत्रण विषय पर प्रशिक्षण क्रमशः ग्राम अनूपपुर व रुदापुर ग्राम में करवाया गया। प्रशिक्षण में कृषको से वार्ता करते हुए मृदा वैज्ञानिक डॉ खलील खान ने मृदा नमूना लेने का तरीका बताते हुए कहा कि खेत के चारों कोनों से मिट्टी लेनी चाहिए। डॉ अजय कुमार सिंह ने ग्राम रुदापुर में कृषकों को संबोधित करते हुए बताया कि सब्जियों में खरीफ में सर्वाधिक रोग लगते हैं, किंतु अगर बीज को थिरम इससे बीज कि सडन कम होती है। बीज की सतह पर रसायन उसके इर्द-गिर्द की मिट्टी में मौजूद रोग कारकों/कीटों आदि को नष्ट कर देता है।
बीज का जमाव अच्छा व समान प्रकार से होता है। जब बीज सडने से बच जाता है। तब पौधा स्वस्थ होता है और बीज अंकुरण की संख्या में इजाफा होता है। बीज से फैलने वाली बीमारियां कम हो जाती हैं। फसल मजबूत व स्वस्थ होती है और पैदावार में वृद्धि होती है। किसानों को आर्थिक लाभ होता है। मिट्टी में रहने वाले पोषक तत्व घुलनशील बनते हैं। इससे वायुमंडल में नाइट्रोजन की स्थिरीकरण होता है। उर्वरकता व उत्पादकता बढ़ता है। प्रदूषण कम होता है। प्रशिक्षण में डॉ निमिषा अवस्थी गृह वैज्ञानिक ने बताया कि सब्जियों का पोषण महत्व बहुत है अतः उनकी फसल में पूरी सावधानी बरतें। इस अवसर पर गांव की महिला एवं पुरुष कृषक उपस्थित रहे।