मप्र : वंचित वर्गों के प्रति होने वाले अत्याचारों की रोकथाम हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हो : डीजीपी सक्सेना

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– अजा/अजजा वर्गों के प्रति संवेदनशीलता विषय पर वेबिनार का शुभारंभ

भोपाल, 24 मार्च (हि.स.)। पुलिस महानिदेशक सुधीर सक्सेना ने गुरुवार को पुलिस मुख्यालय कांफ्रेन्स हॉल से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के प्रति संवेदनशीलता विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय वेबिनार का शुभारंभ किया। सक्सेना ने प्रतिभागी विवेचक अधिकारियों को कहा कि सामाजिक न्याय की सुनिश्चितता हमारा संवैधानिक दायित्व है। शासन एवं मुख्यमंत्री की मंशानुरूप वंचित वर्गों के प्रति होने वाले अत्याचारों की रोकथाम हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। फरियादी से संवेदनशील व्यवहार कर प्रभावी कार्यवाही करें ताकि आमजन के मन में विश्वास निर्मित हो कि उसे न्याय अवश्य मिलेगा।

डीजीपी सक्सेना ने कहा कि उत्कृष्ट विवेचना के साथ-साथ राहत प्रकरणों का भी त्वरित निराकरण करें। इन वर्गों के लिये शासन की बहुत सारी योजनाएं हैं, उनकी जानकारी रखें तथा इस वर्ग के लोगों तक पहुंचाएं ताकि अधिकाधिक लोग लाभांवित हो सकें। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के लिये चिह्न्ति हॉट स्पॉट एरिया में जन चेतना शिविरों का आयोजन करें ताकि सामाजिक समरसता का माहौल निर्मित हो। हमारी सफलता तभी है जब हम इन हॉट स्पॉट को व्यापक जनचेतना तथा जन सहयोग से सामान्य क्षेत्रों में परिवर्तित कर सकें। उन्होंने कहा कि ”साक्षी संरक्षण योजना” के उल्लेखनीय परिणाम रहे हैं अत: इसमें प्रकरण अधिक संख्या में शामिल करें।

उन्होंने कहा कि हॉट स्पॉट एरिया विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में आसूचना संकलन पर विशेष ध्यान देकर अपराध घटित होने के पहले ही निरोधात्मक उपाय करें। विवेचना के दौरान स्पष्ट साक्ष्य संकलित करें तथा संबंधित कानून का स्पष्ट एवं अद्यतन ज्ञान रखें। सम्मन की तामीली समय पर सुनिश्चित हो इसमें लापरवाही बर्दाश्त नही की जाएगी। विवेचना की बिन्दुवार चैक लिस्ट तथा विस्तृत ट्रायल प्लान बनाकर कार्यवाही करें ताकि दोषी दंड से न बच पाये। न्यायालय में पैरवी बहुत अच्छे से हो ताकि पीडि़त पक्ष को समय पर न्याय मिल सके। मुख्यमंत्री के निर्देशों का दृढ़ता से पालन करते हुए समाज के वंचित वर्गों के प्रति पूरी संवेदनशीलता से प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करें।

डीजीपी ने कहा कि यह कार्यशाला सभी प्रतिभागियों के लिये बहुत ही उपयोगी होगी। उन्होंने अपेक्षा करते हुए कहा कि इससे अपनी व्यावसायिक दक्षता को बढ़ाकर उत्कृष्ट कार्यवाही कर पुलिस की छवि में और सुधार लाएं। हम सभी पूरी संवेदशीलता, सजगता और समर्पण के साथ न्याय के लिए अच्छा कार्य करते रहें। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला कमजोर वर्ग के प्रति आपकी सवेंदनशीलता को बढ़ाकर आपको और अधिक क्षमतावान बनाने में सहायक होगी और आपका उत्कृष्ट कार्य पुलिस की छवि और अच्छी बनाएगी।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अजाक राजेश गुप्ता ने वेबिनार में होने वाली गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन साल में दो बार होता है। इसका उद्देश्य कमजोर वर्गों के प्रति विवेचक अधिकारियों की संवेदनशीलता बढ़ाने के साथ-साथ विधि में परिवर्तन और न्यायालयीन निर्णयों से अपडेट करने के साथ ही उत्कृष्ट विवेचना के प्रकरणों पर परिचर्चा आदि है। इस वेबिनार में लगभग सौ प्रतिभागी जुड़े हैं। ये सभी विषय विशेषज्ञों से परस्पर संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान करेंगे।

अधिवक्ता न्यायालय रजनीश बरैया ने न्यायालय में विचारण के दौरान परिलक्षित होने वाली अनुसंधान में त्रुटियां, विरोधाभाष एवं सामान्य भूलें (बचाव पक्ष के दृष्टिकोण से) विषय पर तथा उपायुक्त अनुसूचित जाति विकास विभाग एवं प्रभारी पी.सी.आर. सेल शिवानी गुप्ता ने राहत प्रकरण, जाति प्रमाण-पत्र तथा शासकीय योजनाओं के संबंध में प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान कर संभावित कठिनाइयों के बारे में चर्चा करते हुए उनके निराकरण के उपाए बताए। वेबिनार का समापन 25 मार्च को दोपहर 12:45 बजे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजेश गुप्ता के मुख्य आतिथ्य में होगा।