नई दिल्ली, 09 अक्टूबर । दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ट्रायल कोर्ट के सरकारी वकीलों के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम के जरिये रोजाना अपनी हाजिरी लगाना जरूरी किया गया था। जस्टिस अमित महाजन ने दिल्ली प्रॉसिक्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।
दरअसल, दिल्ली सरकार के अभियोजन निदेशालय ने 5 अक्टूबर को एक सर्कुलर जारी किया था। सर्कुलर में निर्देशित किया गया था कि दिल्ली की सभी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स (ट्रायल कोर्ट) में कार्यरत मुख्य, अतिरिक्त और सहायक लोक अभियोजकों के लिए बायोमेट्रिक मशीन या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से प्रतिदिन सुबह और शाम को उपस्थिति दर्ज कराना जरूरी कर दिया गया है।
दिल्ली प्रॉसिक्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इसी आदेश को कोर्ट में चुनौती दी। याचिका में दलील दी गई कि लोक अभियोजक प्रशासनिक कर्मचारी नहीं, बल्कि कोर्ट के अधिकारी होते हैं। सरकारी वकीलों की दैनिक उपस्थिति और कोर्ट की कार्यवाही में उनका शामिल होना पहले से ही कोर्ट की ऑर्डर शीट में दर्ज होता है। इसलिए बायोमेट्रिक हाजिरी का यह नियम पूरी तरह से मनमाना और तर्कहीन है। यह आधार अधिनियम के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निजता के अधिकार के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है।
मामले की गंभीरता और याचिकाकर्ताओं के तर्कों को देखते हुए जस्टिस अमित महाजन ने दिल्ली सरकार के इस सर्कुलर के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहा है। अब इस कानूनी विवाद पर विस्तृत सुनवाई दिसंबर में होगी, तब तक सरकारी वकीलों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी लगाना जरूरी नहीं होगा।
