हिंदी संवाद ही नहीं संपर्क और राजकाज की भाषा है: रेवती सैनी

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का संकल्प लिया। वहीं मुख्य वक्ता के रूप में जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने कहा कि 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने का मतलब यह नहीं है कि इसका प्रचार प्रसार किया जाए। बल्कि इसे राष्ट्रीय उत्सव की तरह मनाया जाना चाहिए, क्योंकि इसी दिन हिंदी को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में मान्यता प्रदान की है।

वहीं पर कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने कहा कि भारत में प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस उत्साह एवं

गरिमा के साथ मनाया जाता है। यह दिवस हमें अपनी राजभाषा हिंदी के प्रति सम्मान व्यक्त करने तथा इसके महत्व को

समझने का अवसर प्रदान करता है। हिंदी भारत में व्यापक रूप से बोली और समझी जाने वाली भाषाओं में से एक है। इसकी

सरलता, सहजता और मधुरता देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को आपस में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में

स्वीकार किया था। इसके बाद राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर वर्ष 1953 में पहली बार हिंदी दिवस का

आयोजन किया गया। तब से प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

वहीं पर मुख्यवक्ता के रूप में जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने कहा कि हिंदी संवाद की भाषा है और इसे किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है।