महाकाल का पंचामृत अभिषेक, रजत चंद्र-त्रिशूल से राजा स्वरूप शृंगार, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

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उज्जैन, 22 सितंबर । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विशेष पूजन और शृंगार के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब चार बजे मंदिर के कपाट खुले। पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान भगवान महाकाल का हरिओम जल से अभिषेक कर पंचामृत पूजन किया। इसके बाद भांग, चंदन और आभूषणों से भगवान का दिव्य शृंगार किया गया।

भगवान महाकाल को रजत चंद्र, त्रिशूल और त्रिपुंड धारण कराया गया। ड्रायफ्रूट से राजा स्वरूप शृंगार किया गया। इसके साथ शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। भगवान को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

पंचामृत से अभिषेक के बाद भस्म आरती

मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक-पूजन किया गया। भस्म आरती की प्रक्रिया के तहत मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई।

महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मंदिर की परंपरा और मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

नंदी हॉल में भी हुआ पूजन

भस्म आरती के दौरान नंदी हॉल में नंदी महाराज का स्नान, पूजन और ध्यान किया गया। झांझ, मंजीरे और डमरू की मंगल ध्वनि के बीच आरती संपन्न हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए। श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कहते और आशीर्वाद मांगते नजर आए। मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा।