धमतरी के दंगल में 200 पहलवानों ने दिखाए कुश्ती के दांव-पेंच

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धमतरी, 11 सितंबर । छत्तीसगढ़ की प्राचीन लोक परंपरा और कृषि संस्कृति से जुड़े पोरा तिहार के अवसर पर शुक्रवार को गांधी मैदान, सिटी कोतवाली के पास नारबोध कुश्ती प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। दोपहर एक बजे से शुरू हुए इस पारंपरिक दंगल में धमतरी सहित आसपास के गांवों और अन्य जिलों से पहुंचे करीब 200 पहलवानों ने अपने दांव-पेंच और दमखम का प्रदर्शन किया।

पुरुष एवं महिला पहलवानों के बीच हुए रोमांचक मुकाबलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में कुश्ती प्रेमी और दर्शक मौजूद रहे। प्रतियोगिता में धमतरी शहर के विभिन्न अखाड़ों के साथ बांसपारा अखाड़ा, गोकुलपुर अखाड़ा, बनियापारा अखाड़ा, आजाद चौक अखाड़ा, टिकरापारा अखाड़ा, भटगांव अखाड़ा, खेलो इंडिया क्लब के पहलवानों के अलावा बालोद, कांकेर, रायपुर सहित अन्य क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।

प्रतियोगिता में उस्ताद भगवान सिंह यादव, राम ढीमर बाँसपारा, बल्लू यादव आजाद चौक, घनश्याम ध्रुव चर्रा, गुलशन साहू रामपुर भखारा, लक्ष्मण रजक टिकरापारा, मनोज साहू व बलराम साहू कांकेर-बालोद, संतोष साहू बठेना, थानसिंग यादव भटगांव, कुंजविहारी यादव, सरताज अली और रितेश साहू रायपुर सहित कई पहलवानों ने भाग लिया। आयोजन में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, वरिष्ठ नागरिक, युवा और बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित रहे। प्रतियोगिता का आयोजन जिला युवा खिलाड़ी संघ, जिला कुश्ती संघ और क्रीड़ा भारती के सहयोग से किया गया। आयोजन समिति में लक्ष्मण पहलवान, विजय यादव, राहुल गायकवाड़, सूरज छांटा, गीतराम सिन्हा, नुमेश यादव, नोबेल सिन्हा, जतिन दास मानिकपुरी, केतन सिन्हा, तिरुपति कुर्रे और सागर गायकवाड़ सहित अन्य सदस्य सक्रिय रहे। “परंपरा हमारी पहचान है, संस्कृति हमारा गौरव है” की भावना के साथ आयोजित इस दंगल ने पोरा तिहार के उत्सव में पारंपरिक खेलों का रंग भर दिया।

आयोजन में लक्ष्मण पहलवान का हुआ सम्मान

आयोजन के दौरान धमतरी के उन पहलवानों का सम्मान भी किया गया, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ और धमतरी का प्रतिनिधित्व कर जिले का नाम रोशन किया है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खेल रत्न से सम्मानित लक्ष्मण पहलवान का भी स्वागत एवं सम्मान किया गया। इसके साथ ही धमतरी के विभिन्न अखाड़ों के उस्तादों को भी सम्मानित किया गया, जिनके मार्गदर्शन और मेहनत से जिले के पहलवान राष्ट्रीयस्तर तक अपनी पहचान बना रहे हैं। आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक खेल और लोक संस्कृति को जीवंत बनाए रखना तथा नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं से जोड़ना रहा। आयोजकों ने कहा कि नारबोध कुश्ती केवल खेल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पुरानी परंपरा, भाईचारे और खेल संस्कृति का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों से युवाओं में खेलों के प्रति रुचि बढ़ने के साथ ही लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।