नूंह: एफएलएन का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं दक्षता पैदा करना भी है: एडीसी ज्याेति

Share

नूंह, 31 अगस्त । बच्चों को बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान में निपुण बनाने के उद्देश्य से अतिरिक्त उपायुक्त ज्योति ने सोमवार को राजकीय प्राथमिक विद्यालय सालाहेड़ी, घासेड़ा और फिरोजपुर नमक का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालयों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (एफएलएन) की स्थिति का जायजा लेते हुए शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का निरीक्षण किया।

अतिरिक्त उपायुक्त ने प्राथमिक कक्षाओं में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद किया और उनसे विभिन्न प्रश्न पूछकर उनके सीखने के स्तर का आकलन किया। उन्होंने कक्षाओं में अध्यापकों द्वारा अपनाई जा रही शिक्षण विधियों की समीक्षा की और बच्चों के साथ समय बिताकर उनकी सीखने की प्रक्रिया को समझा। राजकीय प्राथमिक विद्यालय फिरोजपुर नमक में अध्यापकों द्वारा तैयार किए गए कम लागत वाले टीचिंग लर्निंग मटेरियल का भी उन्होंने अवलोकन किया। कक्षा में इन सामग्री के प्रभावी उपयोग की सराहना करते हुए एडीसी ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में स्थानीय एवं कम लागत वाली सामग्री से शिक्षण सामग्री तैयार की जानी चाहिए। बच्चों को खेल-खेल में सीखने के अवसर मिलने से उनकी सीखने में रुचि बढ़ती है और कठिन अवधारणाओं को आसानी से समझने में मदद मिलती है।

उन्होंने जिला एफएलएन कोऑर्डिनेटर डॉ. कुसुम मलिक को निर्देश दिए कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले अध्यापकों की एक कोर टीम गठित की जाए। यह टीम अन्य अध्यापकों को कम लागत वाली प्रभावी शिक्षण सामग्री तैयार करने और कक्षा में उसका बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित एवं सहयोग प्रदान करे। इससे विद्यालयों में किए जा रहे अच्छे नवाचारों को जिले के अन्य विद्यालयों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। अतिरिक्त उपायुक्त ने सभी अध्यापकों को निर्देश दिए कि निपुण हरियाणा मिशन के तहत निर्धारित समय-सारणी को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षक संदर्शिका का नियमित रूप से उपयोग करते हुए उसके अनुरूप पाठ योजना तैयार कर शिक्षण कार्य किया जाए। विद्यार्थियों की कार्यपुस्तिकाओं पर भी शिक्षक संदर्शिका के अनुसार कार्य करवाने और उनके कार्य की नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण जांच करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

उन्होंने कहा कि एफएलएन का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं है, बल्कि प्रत्येक बच्चे में पढ़ने, समझने और लिखने की क्षमता विकसित करने के साथ-साथ बुनियादी गणितीय अवधारणाओं को व्यवहार में प्रयोग करने की दक्षता पैदा करना है। इसके लिए शिक्षकों को बच्चों के सीखने के स्तर के अनुसार प्रभावी एवं रोचक शिक्षण गतिविधियों को अपनाना चाहिए।