स्थानीय निकाय चुनाव 2026: अजमेर निगम के 80 वार्डों में से कांग्रेस 78 व भाजपा सभी पर चुनाव लड़ेगी

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अजमेर, 31 अगस्त। अजमेर नगर निगम चुनाव में पार्षद पद के उम्मीदवारों की भाजपा व कांग्रेस ने घोषणा कर दी है। इनके सीधे सिंबल निर्वाचन अधिकारी को सौंपे गए है। नाम नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस जहां अजमेर नगर निगम के 80 में से 78 वार्डों में चुनाव लड़ रही है वहीं भाजपा ने सभी 80 वार्डों में अपने प्रत्याशी उतारे हैं। कांग्रेस ने जिन दो वार्डों में प्रत्याशी नहीं उतारे हैं वहां उन्होंने अपना निर्दलियों पर दाव खेला है। इधर, प्रत्याशियों के चयन को लेकर भाजपा व कांग्रेस दोनों में ही विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं। दोनों ही दल अपने अपने डेमेज कंट्रोल को किस तरह करेंगे यह आने वाले दिनों में देखने योग्य होगा।

अजमेर दक्षिण की विधायक अनिता भदेल के विरोध में एडवोकेट महेंद्र भाटी ने तो अपना सिर मुंडवा लिया है। वहीं कांग्रेस की ओर से जैन समाज का एक भी प्रत्याशी नहीं उतारे जाने को लेकर जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। अजमेर नगर निगम के कई पुराने दिग्गजों को भी टिकट से वंचित रख कर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने विरोध को हवा दी है। यह बात अलग है कि इस बार दोनों ही दलों ने कई नए चेहरों पर तो कई वार्डों में पुराने कार्यकर्ताओं के परिवार के किसी महिला सदस्य को प्रत्याशी बनाया है। नामांकन भरे जाने को लेकर अजमेर कलेक्ट्रेट में भारी भीड़ रही। प्रत्याशियों और उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। शहर की चाय चौपालों पर लोगों में उम्मीदवारों को लेकर चर्चा होती रही। उम्मीदवारों के चयन का सही और गलत ठहराते हुए राजनीति के जानकारी लंबी बहस भी करते दिखाई दिए। इसबार उम्मीदवारों के चयन में चर्चा का खास विषय उन लोगों को भी दोनों ही राजनीति दलों द्वारा तवज्जो दिया जाना है जिन्होंने पिछले चुनाव में पार्टी के बागी होकर चुनाव लड़ा था।

कांग्रेस के शहर जिलाअध्यक्ष डॉ राजकुमार जयपाल दो दिन से अस्वस्थ होने के कारण निकाय चुनाव प्रत्याशी नामांकन के अंतिम दिनों में कतई सक्रिय नहीं दिखने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी रोष दिखाई दिया है। वही भारतीय जनता पार्टी में विगत एक पखवाड़े से पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत और विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक वासुदेव देवनानी के बीच चल रहे राजनीतिक आरोप प्रत्यारोपों के बीच बहुत से कार्यकर्ता उनके वाद विवाद को मतभिन्नता रखते है। ऐसे में उनका उत्साह और सक्रियता क्षीण हो गई है। कार्यकर्ता दोनों बड़े नेताओं की लड़ाई में उलझने के बजाय दूरी बनाए रखने में विश्वास कर रहा है। इसका सीधा असर वार्ड स्तर पर मतदान प्रतिशत पर पड़ने की आशंका है।

भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष रमेश सोनी की पत्नी रंजना सोनी को वार्ड संख्या 12 से चुनाव मैदान में उतारा गया है। नगर निगम के 80 वार्ड में सबसे कम वोटर यहां है। वहीं भाजपा ने वार्ड संख्या 59 से पूर्व सभापति सुरेन्द्र सिंह शेखावत की पत्नी मधु शेखावत को टिकट दिया है। भाजपा की महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष व पूर्व बोर्ड में पार्षद रही भारती श्रीवास्तव को टिकट दिया है लेकिन उनका वार्ड बदलकर 78 कर दिया है। भाजपा के मंडल अध्यक्ष रचित कच्छावा को वार्ड 65 से टिकट मिला है। हाथी खेड़ा के सरपंच रहे लाल सिंह रावत की पत्नी मंजूदेवी को वार्ड 5 से टिकट दिया गया है।

पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत की पत्नी ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के निवास वाले वार्ड नंबर 4 से ओबीसी महिला की सीट पर निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल किया है। इस वार्ड से कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। भाजपा ने यहां पर कांग्रेस को छोड़ कर भजपा में शामिल हुई मोनिका जैन पर भरोसा जताया है।

जोरदार बात रही कि अजमेर विकास प्राधिकरण के चेयरमेन रहे शिवशंकर हेड़ा की पुत्र वधु अंबिका हेड़ा ने न केवल भाजपा से दावेदारी की नामांकन भी भाजपा से दाखिल किया लेकिन उनको टिकट नहीं दिया गया। पूर्व बोर्ड में पार्षद रही प्रतिभा पाराशर, रूबी जैन, अंजना शेखावत, हेमलता बंसल, नीतू मिश्रा का टिकट काट दिया गया। पूर्व बोर्ड में मेयर रही ब्रजलता हाड़ा डिप्टी मेयर रहे नीरज जैन को टिकट नहीं दिया गया । हालाकि उनकी ओर से दावेदारी किए जाने की बात भी सामने नहीं आई है।

कांग्रेस में पूर्व बोर्ड में जीत कर आए पार्षदों के टिकट काट दिए। इसमें प्रतिपक्ष नेता द्रोपदी कोली, हितेश्वरी टांक, गजेन्द्र सिंह रलावता, बनवारीलाल शर्मा, नुकुल खंडेलवाल, नरेश सत्यावना, कांग्रेस महिला मोर्चा की अध्यक्ष लक्ष्मी बुंदेल आदि शामिल है। वहीं नए में कांग्रेस नेताओं ने अपने रिश्ते दारों पर भरोसा जताया है।

कांग्रेस की जारी सूची में गहलोत गुट के उम्मीदवार ज्यादा रहे। आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ व जिलाध्यक्ष डॉ राजकुमार जयपाल के करीबियों को टिकट मिले हैं जबकि सचिन पायलट गुट के विधानसभा चुनाव लड़ने वाले महेन्द्र सिंह रलावता, विजय जैन, हेमंत भाटी समर्थकों को जगह नहीं दी गई है।

अजमेर दक्षिण विधायक अनिता भदेल के विरोध में एडवोकेट महेंद्र भाटी ने सिर का मुंडन कराया। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। भाटी ने मुंडन के जरिए विधायक के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि विरोध के पीछे के मुद्दों और उनकी विस्तृत मांगों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। भाटी के इस कदम को लेकर समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अनिता भदेल अजमेर दक्षिण से भाजपा की विधायक हैं।

स्थानीय निकाय चुनाव में पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत, पूर्व पार्षद ज्ञान सारस्वत और कांग्रेस का गठजोड़ आखिर उजागर हो गया। कांग्रेस ने वार्ड नंबर 3 और 4 पर अपना कोई भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतरा है। तीनों में हुए गठजोड़ के चलते ही वार्ड 3 से भाजपा से निष्कासित सुभाष काबरा के भाई विमल काबरा की पत्नी संध्या और पूर्व में धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत वार्ड 4 चुनाव लड़ेंगी। चुनाव की शुरुआत में ही यह माना जा रहा था कि कांग्रेस बाहर एक से लेकर 6 तक समझौता कर सकती है। इन वार्डों में पूर्व पार्षद ज्ञान सारस्वत का दबदवा माना जाता है। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर ज्ञान सारस्वत वर्ष 2015 में वार्ड 3 से 3000 से अधिक मतों से निर्दलीय चुनाव जीते थे और वर्ष 2021 में वार्ड 4 से 2900 वोट से चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। पहले वार्ड एक और साथ में खुद ज्ञान सारस्वत और वार्ड तीन में उनकी बेटी को चुनाव लड़ने पर सहमति हुई थी। लेकिन बाद में सारस्वत ने अपने कदम पीछे खींच लिए।