का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराया है।
जिंदल स्टेनलेस के जाजपुर और हिसार संयंत्रों से विशेष रूप से आपूर्ति
किए गए प्रीमियम ऑस्टेनिटिक स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल इस
हाइड्रोजन ट्रेन के निर्माण में किया गया है। हाइड्रोजन प्रणोदन प्रणाली से लैस यह
ट्रेन पर्यावरण अनुकूल परिवहन साधन अपनाने की भारतीय रेलवे की दिशा में एक महत्वपूर्ण
कदम है। जंग से बचाव, अधिक सुरक्षा, ज्यादा मजबूती, कम वजन, आग और टक्कर
का बेहतर सामना करने की क्षमता, दीर्घकालिक इस्तेमाल और पुनर्चक्रण की सुविधा जैसे
गुणों के कारण आधुनिक रेल डिब्बों के लिए स्टेनलेस स्टील सबसे पसंदीदा सामग्री बन गया
है। इसके हल्के वजन से ऊर्जा दक्षता भी बढ़ती है, जिससे यह हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों
जैसे नए परिवहन साधनों के लिए खास तौर पर उपयुक्त है।
जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने शनिवार को कहा
कि भविष्य में परिवहन सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा पर ही नहीं, बल्कि ऐसी बेहतर सामग्रियों पर
भी निर्भर करेगा जो इन चीजों को ज्यादा प्रभावी, मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बनाएं।
भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन में योगदान देना हमारे लिए गर्व की बात
है। यह देश की स्वच्छ परिवहन व्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक
बड़ी उपलब्धि है। स्टेनलेस स्टील ने रेलवे में अपनी मजबूती, जंग न लगने की क्षमता, सुरक्षा
और लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन के कारण अपनी उपयोगिता बार-बार साबित की है।
भारत जैसे-जैसे
नई पीढ़ी के परिवहन ढांचे का तेजी से विकास कर रहा है, हम ऐसे स्टेनलेस स्टील समाधान
उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो नवाचार को बढ़ावा दें, टिकाऊ हों और लंबे समय
तक बेहतर प्रदर्शन करें। जिंदल स्टेनलेस पिछले तीन दशकों से भारतीय रेलवे को स्टेनलेस
स्टील की आपूर्ति कर रही है। कंपनी ने पहले एलएचबी कोच, वंदे भारत स्लीपर, भारत की
पहली वंदे मेट्रो ट्रेन सहित कई मेट्रो और इंटरसिटी ट्रेनों जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं
के लिए स्टेनलेस स्टील उपलब्ध कराया है।