प्रयागराज, 11 जुलाई । समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने शनिवार को सरकार के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पौधरोपण अभियान की जमीनी स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुधार एवं संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन उचित योजना और पौधों की देखरेख के अभाव में यह अभियान केवल कागजी आंकड़ों और फोटो खिंचवाने तक सीमित होकर रह गया है।
पूर्व सांसद ने कहा कि हर वर्ष मानसून के दौरान रिकॉर्ड संख्या में पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उनके संरक्षण की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं होती। अधिकांश स्थानों पर न तो पौधों के लिए ट्री-गार्ड लगाए जाते हैं और न ही नियमित सिंचाई की व्यवस्था की जाती है। परिणामस्वरूप अधिकांश पौधे कुछ ही महीनों में सूख जाते हैं या मवेशियों द्वारा नष्ट कर दिए जाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पौधरोपण के दौरान स्थानीय मिट्टी और जलवायु का वैज्ञानिक अध्ययन किए बिना कहीं भी किसी भी प्रजाति के पौधे लगा दिए जाते हैं। कई स्थानों पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल न होने वाले पौधों का रोपण किया जाता है, जिससे पर्यावरण और जैव विविधता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।
सपा नेता रेवती रमण सिंह ने कहा कि वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों का पूरा ध्यान केवल निर्धारित लक्ष्य पूरा करने तक सीमित रहता है। पौधारोपण के बाद पौधों के जीवित रहने की निगरानी, ऑडिटिंग अथवा जियो-टैगिंग की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है, जिससे अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ जाती है।
पूर्व सांसद के प्रतिनिधि विनय कुशवाहा ने शनिवार को बताया कि रेवती रमण सिंह ने अभियान को प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पौधे को कम से कम एक वर्ष तक संबंधित विभाग, संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी में रखा जाए, ताकि उसकी सुरक्षा, ट्री-गार्ड और नियमित सिंचाई सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि लगाए गए पौधों का प्रत्येक छह माह में किसी स्वतंत्र संस्था या गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) से ‘ग्रीन ऑडिट’ कराया जाए। यदि किसी विभाग या अधिकारी द्वारा केवल कागजों पर पौधरोपण दिखाया जाता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
रेवती रमण सिंह ने कहा कि अभियान में नीम, पीपल, बरगद, पाकड़, महुआ और जामुन जैसे पारंपरिक, दीर्घायु एवं पर्यावरण के लिए उपयोगी वृक्षों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि ये लंबे समय तक जीवित रहते हैं और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर देते हुए कहा कि नागरिकों को केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित न रखा जाए। जो व्यक्ति अपने लगाए गए पौधे को तीन वर्ष तक सुरक्षित रखे, उसे सरकार की ओर से कर में छूट अथवा अन्य प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
पूर्व सांसद ने कहा कि यदि सरकार ने पौधरोपण अभियान की कार्य प्रणाली में सुधार नहीं किया, तो यह अभियान भी पूर्व की योजनाओं की तरह केवल सरकारी धन की बर्बादी बनकर रह जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल नारे नहीं, बल्कि ईमानदार प्रयास और प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।