राजीव गांधी वन संवर्धन योजना: हिमाचल में जंगल बढ़ाने के साथ ग्रामीणों को रोजगार देने पर जोर - सरस जनवाद

राजीव गांधी वन संवर्धन योजना: हिमाचल में जंगल बढ़ाने के साथ ग्रामीणों को रोजगार देने पर जोर

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धर्मशाला, 11 जुलाई । हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2030 तक राज्य के वन आवरण को करीब 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जा रहा है।

वन विभाग का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य केवल नए पौधे लगाना नहीं है। इसके साथ स्थानीय लोगों को वन संरक्षण से जोड़ना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना भी इसका अहम हिस्सा है। योजना में महिला मंडलों, युवक मंडलों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

धर्मशाला के पास घुरकड़ी गांव के स्वयं सहायता समूह “ओम नमो नारायण” की महिलाएं इस योजना में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

समूह की प्रधान आशा देवी और उनकी साथी अनीता कुमारी, अरुणा कुमारी, पुष्पा देवी, अनीता देवी, शांति देवी और प्रेमलता ने बताया कि वन विभाग ने उन्हें करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में काम की जिम्मेदारी दी। उन्होंने पहले लैंटाना की झाड़ियों को हटाकर जमीन तैयार की, फिर क्षेत्र की घेराबंदी की और स्थानीय प्रजातियों के 1,600 से अधिक पौधे लगाए। इसके बाद सभी पौधों की नियमित देखभाल भी की गई।

महिलाओं का कहना है कि जंगली जानवरों से पौधों को बचाने के लिए उन्होंने पारंपरिक घरेलू उपाय अपनाए, जिसके अच्छे परिणाम मिले। उनके अनुसार आज लगाए गए अधिकांश पौधे सुरक्षित हैं और अच्छी तरह बढ़ रहे हैं।

धर्मशाला वन मंडल के मंडलीय वन अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष वन मंडल के तहत करीब 28 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 22 हजार पौधे लगाए गए थे। यह काम महिला मंडलों, युवक मंडलों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से पूरा हुआ।

उन्होंने कहा कि इस योजना की खास बात यह है कि केवल पौधे लगाने पर काम खत्म नहीं होता। अगले वर्ष पौधों के जीवित रहने की दर का आकलन भी किया जाता है। यदि पौधों का संरक्षण और रखरखाव संतोषजनक पाया जाता है तो संबंधित महिला मंडल, युवक मंडल या स्वयं सहायता समूह को प्रोत्साहन के रूप में एक लाख रुपये तक की सम्मान राशि देने का प्रावधान है।

वन विभाग के अनुसार इस वर्ष योजना का दायरा और बढ़ाया गया है। धर्मशाला वन मंडल के तहत 17 महिला मंडलों, छह युवक मंडलों और पांच स्वयं सहायता समूहों को इसमें शामिल किया गया है। यह अभियान धर्मशाला, शाहपुर, नगरोटा बगवां और कांगड़ा विधानसभा क्षेत्रों में चलाया जाएगा।

पौधरोपण के दौरान हरड़, बेहड़ा, आंवला सहित स्थानीय प्रजातियों के औषधीय और फलदार पौधों को प्राथमिकता दी जा रही है। विभाग को उम्मीद है कि इस वर्ष करीब तीन हजार महिलाएं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इस अभियान से जुड़ेंगे, जिससे वन संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी भी मजबूत होगी।