जयपुर, 05 मई । राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर के करतारपुरा नाले में अतिक्रमण से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका को जेडीए के जवाब के बाद निस्तारित कर दिया है। जस्टिस पीएस भाटी और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश राजेन्द्र प्रसाद शर्मा की जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए दिए।
जेडीए की ओर से अधिवक्ता अमित कुड़ी ने अदालती आदेश की पालना में शपथ पत्र पेश किया। जिसमें कहा गया कि करतारपुरा नाले की चौडाई 32.6 मीटर रखा जाएगा और जल प्रवाह के दोनों और पांच-पांच मीटर का कॉरिडोर बनाया जाएगा। परियोजना के डिजाइन एमएनआईटी के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार कराने के दौरान आगामी सौ साल की क्षमता का ध्यान भी रखा गया है। जेडीए की ओर से कहा गया कि इस नाले से गाद हटाकर उसे पक्का किया जाएगा। इसके अलावा वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करते हुए इसके सीवरेज को द्रव्यवती नदी के एसटीपी प्लांट से जोड़ा जाएगा।
जनहित याचिका में अधिवक्ता विमल चौधरी और अधिवक्ता योगेश ने बताया कि नाले में जगह-जगह अतिक्रमण हो गया है और नाला पक्का भी नहीं है। अतिक्रमण के कारण कई जगहों पर नाले की चौडाई कम होकर कुछ फीट ही रह गई है। वहीं उचित व्यवस्था नहीं होने से मानसून में यहां कई दुर्घटनाएं हो चुकी है। एक युवक कार सहित इसमें बह चुका है। इस दौरान उसकी मौत भी हो गई थी। गौरतलब है कि पूर्व में जेडीए की ओर से अदालत में रिपोर्ट पेश कर कहा गया था कि नाले की चौडाई तीस मीटर रखने के साथ ही दोनों और दस-दस मीटर का कॉरिडोर रखा जाएगा। जिससे कई लोगों के निर्माण इसकी जद में आ गए थे।