डीएफएस ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए ‘वायबिलिटी प्लान 2.0’ को दी मंजूरी

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नई दिल्ली, 05 मई । वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के लिए एक संशोधित ‘वायबिलिटी प्लान 2.0’ को मंजूरी दे दी है। यह प्लान वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2027-28 तक के लिए है।

वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में बताया कि डीएफएस ने वित्तीय क्षेत्र में उभरती चुनौतियों और लगातार निगरानी की जरूरत को देखते हुए अब वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2027-28 तक 3 साल की और अवधि के लिए एक संशोधित ‘वायबिलिटी प्लान 2.0’ को अपनी मंजूरी दे दी है, जिसका मकसद आरआरबी की वित्तीय स्थिरता और लंबी अवधि की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।

मंत्रालय ने कहा कि संशोधित तीन-वर्षीय ढांचे का उद्देश्य सभी 28 आरआरबी में वित्तीय स्थिरता को मजबूत करना और परिचालन दक्षता में सुधार लाना है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में प्रदर्शन की निगरानी को संस्थागत रूप देने और शासन सुधारों को मजबूत करने के लिए डी वित्तीय सेवा विभाग ने वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2024-25 तक की अवधि के लिए एक तीन-वर्षीय व्यवहार्यता योजना (वायबिलिटी प्लान) शुरू की थी। यह फ्रेमवर्क आरआरबी के वित्तीय प्रदर्शन को बेहतर बनाने और निगरानी तंत्र को मज़बूत करने में अहम रहा है।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक वायबिलिटी प्लान 2.0 में 30 परफॉर्मेंस पैरामीटर्स का एक तय सेट शामिल है, जो 4 मुख्य स्तंभों पर आधारित है, जिसमें ऑपरेशनल एक्सीलेंस, एसेट क्वालिटी, प्रॉफिटेबिलिटी और ग्रोथ। इन चार स्तंभों के मुख्य पैरामीटर्स में सीआरएआर, क्रेडिट-डिपॉजिट रेश्यो, डिजिटल एडॉप्शन, एनपीए लेवल्स, रिकवरी परफॉर्मेंस, प्रॉफिटेबिलिटी रेश्यो और भारत सरकार की योजनाओं को लागू करने में परफॉर्मेंस शामिल हैं।

मंत्रालय ने कहा कि संक्षेप में वायबिलिटी प्लान 2.0, आरआरबी के समग्र स्वास्थ्य और कार्यकुशलता का आकलन और निगरानी करने के लिए एक संतुलित और व्यापक ढांचा प्रदान करता है। इस पहल से सभी 28 आरआरबी में वित्तीय स्थिरता को मज़बूती मिलने और परिचालन कार्यकुशलता में सुधार होने की उम्मीद है; साथ ही, यह यह भी सुनिश्चित करेगा कि आरआरबी ग्रामीण ऋण विस्तार, डिजिटल समावेशन और वित्तीय पहुंच जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बने रहें।