सुप्रीम कोर्ट ने थानों में सीसीटीवी के लिए इस्तेमाल फंड का केंद्र और राज्यों से मांगा हिसाब

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नई दिल्ली, 28 अप्रैल । उच्चतम न्यायालय ने देशभर के थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए फंड के इस्तेमाल को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों से हिसाब मांगा है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने एमिकस क्यूरी सिद्धार्थ दवे को 6 मई को केंद्र और राज्यों के गृह सचिवों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि वो ये जानना चाहता है कि राज्यों को सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए जो भारी फंड दिया गया था उसका उपयोग सही जगह पर हुआ कि नहीं। मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि 6 मई को होने वाली बैठक में केंद्र सरकार के गृह सचिव या उनकी ओर से नामित अधिकारी मौजूद रहें। ये नामित अधिकारी संयुक्त सचिव या अतिरिक्त सचिव रैंक से नीचे का नहीं होने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस बैठक में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के गृह सचिवों को भी अनिवार्य रुप से हिस्सा लेना होगा। कोर्ट ने कहा कि इस बैठक में राज्यों से सिर्फ इस फंड के इस्तेमाल पर जवाब मांगा जाएगा और इसकी पूरी रिपोर्ट 13 मई को कोर्ट में पेश की जाए।

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को फंड के बंटवारे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्रशासित प्रदेशों के थानों के अंदर सीसीटीवी लगाने का सौ फीसदी खर्च केंद्र सरकार उठाती है। पहाड़ी राज्यों में सीसीटीवी लगाने के लिए 90 फीसदी पैसा केंद्र सरकार देती है जबकि 10 फीसदी राज्य सरकार उठाती है। इसके अलावा बाकी राज्यों में 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार और 40 फीसदी हिस्सा राज्य सरकारें उठाती हैं।

सात अप्रैल को केंद्र सरकार ने कहा था कि वो देश भर के थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने से संबंधित सभी मामलों को दो हफ्ते में हल कर लेगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा था कि वो खुद इस मामले पर नजर रखे हुए हैं और इस मामले में काफी कुछ प्रगति हुई है। अटार्नी जनरल ने कहा था कि इस मामले में कोर्ट की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी के साथ दूसरे अधिकारियों की लगातार बैठकें हो रही हैं और इस मामले में काफी कुछ प्रगति हुई है। चार सितंबर 2025 को उच्चतम न्यायालय ने देश भर के थानों में सीसीटीवी काम नहीं करने के मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। कोर्ट ने कहा था कि 2020 के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद थानों में सीसीटीवी काम नहीं कर रहे हैं।

उच्चतम न्यायालय ने एक अखबार की खबरों पर संज्ञान लिया था। खबर में कहा गया था कि इस साल के सात-आठ महीनों के अंदर पुलिस हिरासत में करीब 11 लोगों की मौत हो चुकी है। दो दिसंबर 2020 को कोर्ट ने सभी राज्यों को अपने पुलिस स्टेशनों पर ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ सीटीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने आने-जाने वाले द्वार समेत हर अहम स्थानों पर कैमरे लगाने और उसकी रिकॉर्डिंग डेढ़ साल तक संरक्षित रखने का निर्देश दिया था। उच्चतम न्यायालय ने पुलिस ज्यादती पर रोक लगाने के लिए आदेश दिया था कि देशभर के सभी थानों में सीसीटीवी लगाए जाएं।