रांची, 23 अप्रैल । झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर (रजरप्पा मंदिर) परिसर के सौंदर्यीकरण से जुड़े मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने हटाए गए दुकानदारों के स्थायी पुनर्वास, भैरवी नदी के डेंजर जोन में बैरिकेडिंग और श्रद्धालुओं के लिए अस्पताल निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान रामगढ़ के जिला उपायुक्त ने अदालत को बताया कि मंदिर परिसर से हटाए गए 254 वेंडरों को मंदिर के निकट अस्थायी रूप से पुनर्वासित किया जाएगा। इसके लिए स्थान भी चिन्हित कर लिया गया है। इस पर अदालत ने मौखिक रूप से निर्देश देते हुए कहा कि दुकानदारों के लिए स्थायी निर्माण कराया जाए और उन्हें व्यवस्थित दुकानें बनाकर दी जाएं। साथ ही निर्धारित किराया लिया जाए, जिससे दुकानदारों को राहत मिले और सरकार को राजस्व भी प्राप्त हो।
जल संसाधन विभाग के सचिव ने अदालत को जानकारी दी कि भैरवी नदी के डेंजर जोन में सुरक्षा के लिए लगभग 50 लाख रुपये की लागत से बैरिकेडिंग के लिए डीपीआर तैयार किया गया है। इस पर अदालत ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर अपने सीएसआर फंड से इस निर्माण कार्य को कराने पर निर्णय ले। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बरसात शुरू होने से पहले बैरिकेडिंग का कार्य पूरा होना चाहिए।
इसके अलावा अदालत ने सीसीएल को मंदिर के निकट श्रद्धालुओं के लिए अस्पताल निर्माण के संबंध में भी अपने सीएसआर फंड से निर्णय लेने को कहा। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है, जिस पर चड्ढा एंड एसोसिएट्स काम कर रही है।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अगली सुनवाई में रांची के उपायुक्त को फिर से उपस्थित रहने और विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
अदालत ने इससे पहले पर्यटन सचिव को मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर का दौरा कर सौंदर्यीकरण को लेकर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। दरअसल, वर्ष 2023 में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने मंदिर परिसर के विकास और सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण आदेश दिए थे।
मां छिन्नमस्तिका मंदिर के निकट स्थित भैरवी नदी तट पर सुरक्षा के अभाव में कई लोगों की जान जा चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आदेशों के अनुपालन को जरूरी बताया है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधा और सुरक्षा मिल सके।
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी ने अवमानना याचिका दाखिल कर 11 अगस्त 2023 को पारित आदेश के अनुपालन की मांग की है। उस आदेश में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, स्थायी स्नान घाट, वस्त्र बदलने के कक्ष, शौचालय, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सीय सुविधाएं, अतिक्रमण हटाने और नदी चौड़ीकरण सहित दस अनिवार्य निर्देश जारी किए गए थे।————–