भोपाल, 24 अप्रैल । मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से शुक्रवार को भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। यह मुलाकात आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राज्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत हुई, जिसमें आंतरिक सुरक्षा, प्रशासनिक अनुभवों के आदान-प्रदान और विभिन्न सेवाओं के बीच समन्वय को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में कोर्स डायरेक्टर अनुपमा रावत सहित वर्ष 2014, 2015 और 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों का परिचय डीजीपी के पीएसओ डॉ. विनीत कपूर ने कराया। इस अवसर पर एसओ मलय जैन भी उपस्थित रहे।
डीजीपी कैलाश मकवाणा ने अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय विदेश सेवा देश की अत्यंत महत्वपूर्ण सेवाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि विदेशों में पदस्थ अधिकारी केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां नहीं निभाते, बल्कि वे भारत की छवि, प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता के प्रतिनिधि होते हैं। इसलिए इस सेवा में उच्च आचरण, अनुशासन, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता आवश्यक है।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पुलिस व्यवस्था समय के साथ काफी बदली है। पहले संसाधनों और तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, लेकिन पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत अब संचार प्रणाली, डिजिटल रिकॉर्ड (ई-ऑफिस), ईएचआरएमएस और CCTNS जैसे सिस्टम से कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और पारदर्शी हुई है।
डीजीपी ने वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नारकोटिक्स और साइबर अपराध तेजी से बढ़ती चिंता का विषय हैं। साइबर फ्रॉड पर नियंत्रण के लिए एक लाख रुपये से अधिक के मामलों में अनिवार्य ई-जीरो FIR दर्ज करने की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। उन्होंने अपने 38 वर्षों के अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस सेवा की असली सीख जमीनी स्तर पर मिलती है। उन्होंने सिंगरौली बैंक डकैती जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और पूर्व में ‘चड्डी-बनियान गैंग’ के खिलाफ अभियानों का उल्लेख करते हुए टीमवर्क, सूचनातंत्र और समन्वय को सफलता की कुंजी बताया। डीजीपी ने यह भी कहा कि नियमित जनसुनवाई से आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान संभव होता है और मध्यप्रदेश में सुशासन एवं सुरक्षित वातावरण स्थापित है। उन्होंने अधिकारियों को सेवा की गरिमा बनाए रखने और हर परिस्थिति में जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की सीख दी।
इस दौरान IFS अधिकारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें प्रशासन, उद्योग, पर्यटन, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिला। उन्होंने उज्जैन स्थित महाकाल लोक और महाकालेश्वर मंदिर, विदिशा की उदयगिरि गुफाओं के भ्रमण को विशेष रूप से उपयोगी बताया। अधिकारियों ने सिंगापुर, फ्रांस, म्यांमार, जापान, स्पेन, इंडोनेशिया और न्यूयॉर्क में अपने कार्य अनुभव साझा करते हुए कहा कि हर देश की प्रशासनिक और सुरक्षा चुनौतियां अलग होती हैं। विदेशों में भारतीय दूतावासों की भूमिका केवल कूटनीति तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण होती है।
यह संवाद सत्र प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और अनुभवों से भरपूर रहा।