मोगा में लोहड़ी के त्योहार से ठीक दो दिन पहले एक परिवार ने अपनी नवजात बेटी का स्वागत एक खास अंदाज में किया। जब छोटी बच्ची को अस्पताल से घर लाया गया, तो परिवार ने ढोल तथा पटाखों के साथ उसका भव्य स्वागत किया। ये समारोह केवल परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे मोहल्ले के लोग भी इस खुशी में शामिल हुए। नवजात की दादा, हिम्मत सिंह ने इस मौके पर बताया कि एक सप्ताह पहले उनके बड़े बेटे के घर जुड़वां बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) का जन्म हुआ था। इसके साथ अब उनके छोटे बेटे के घर भी एक नन्ही सी बेटी का आगमन हुआ है। इसे लेकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है।
हिम्मत सिंह ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि उनके परिवार में लड़का और लड़की के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। उन्होंने गर्व से कहा कि दोनों बेटों के घर लक्ष्मी का आगमन होने से पूरे परिवार में खुशियों की लहर है। आने वाली लोहड़ी पर परिवार की पूरी तैयारी है, क्योंकि तीनों बच्चों की पहली लोहड़ी को धूमधाम से मनाने की योजना बनाई जा रही है। ऐसे में इस परिवार का लोहड़ी समारोह और भी खास बनने जा रहा है।
बच्ची की नानी चरणजीत कौर ने भी अपनी खुशी साझा की और बताया कि उनके खुद के तीन बेटियां हैं, जो हर सुख-दुख में उनके साथ रहती हैं। उन्होंने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि बेटा और बेटी में भेदभाव करना गलत है। दोनों की अपनी अनूठी विशेषताएं और महत्व हैं। यह परिवार जिस तरह से अपनी पोती के जन्म का जश्न मना रहा है, वह समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश प्रस्तुत करता है।
इस प्रकार, इस छोटे से परिवार की कहानी समाज में बेटा-बेटी की समानता का एक उदाहरण पेश करती है। यह ना केवल महिलाओं की स्थिति को स्वीकार करने का संकेत है, बल्कि समाज में एक नई सोच की नींव भी रखती है। ऐसे जश्न और त्योहार समाज को यह सिखाते हैं कि हमें लिंग भेद के बिना अपने बच्चों का स्वागत करना चाहिए और हर बच्चे को समान प्यार और सम्मान देना चाहिए।
इस अनूठे जश्न का महत्व इस बात को भी दर्शाता है कि कैसे हर नया जीवन एक नई उम्मीद और खुशियों की किरण लाता है। समाज के सभी वर्गों को ऐसे मौके पर एकजुट होकर खुशी मनानी चाहिए, जिससे जिंदगी का हर पल खास बने और हमें एक दूसरे की खुशी में शामिल होने की प्रेरणा मिले। इस तरह के सकारात्मक उदाहरण समाज में एक नई चेतना विकसित करने के लिए योगदान देते हैं।