संगरूर से सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर ने केंद्र सरकार द्वारा पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में सीनेट चुनावों को रद्द करने के प्रयासों की तीव्र आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि ऐसी किसी भी स्थिति को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। मीत हेयर ने स्पष्ट किया है कि पंजाब यूनिवर्सिटी के मान-सम्मान को बनाए रखने के लिए वे हरसंभव संघर्ष करेंगे। उन्होंने उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को एक पत्र लिखकर इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है।
पत्र में मीत हेयर ने उल्लेख किया है कि केंद्र सरकार ने पहले भी पंजाब यूनिवर्सिटी को पंजाब से अलग करने की कोशिश की थी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार ने ऐसा करने की नीति का विरोध किया था। राज्य सरकार ने केंद्र के खिलाफ निर्णायक रूप से अपनी बात रखी और उसे मजबूर किया कि वह अपने कदम पीछे खींचे। इस प्रकार, पंजाब विधानसभा में भी इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जो पंजाब यूनिवर्सिटी के केंद्रीयकरण के विरोध में था।
गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सीनेट चुनावों को रोकने का निर्णय लोकतांत्रिक प्रथाओं पर एक बड़ा आघात है। उन्होंने पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत से संबंधित मामलों पर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को भी पुनः स्थापित किया। सांसद ने उप राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें और सुनिश्चित करें कि विश्वविद्यालय की सीनेट के चुनाव समय पर आयोजित हों।
पत्र के दौरान, मीत हेयर ने कहा, “पंजाब यूनिवर्सिटी हमारी ऐतिहासिक धरोहर का एक अभिन्न हिस्सा है। किसी भी प्रकार के हमले को हमें बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। इस विश्वविद्यालय का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है और यह पूरे पंजाब का गौरव है। इसीलिए मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि सीनेट चुनाव तुरंत कराए जाएं।”
उप राष्ट्रपति को लिखे पत्र में मीत हेयर ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब यूनिवर्सिटी ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और इस संस्था के प्रति किसी भी प्रकार के अन्याय को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका यह बयान केवल एक सांसद के तौर पर नहीं, बल्कि पंजाब की सांस्कृतिक पहचान और शिक्षा के संवर्धन के प्रति उनकी गहरी समझ को भी दर्शाता है।
इस प्रकार, मीत हेयर के इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि पंजाब यूनिवर्सिटी के सीनेट चुनाव केवल एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और उसके इतिहास का अहम हिस्सा हैं। इन चुनावों की स्थिति पर नजर रखने और उनके महत्व को समझने की आवश्यकता है, ताकि पंजाब की शैक्षणिक संस्थाएं अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रख सकें।