-आईपीएम ओरिएंटेशन कार्यक्रम में राज्य कृषि रक्षा विभाग के अधिकारियों का हुआ प्रशिक्षण
लखनऊ, 21 सितम्बर (हि.स.)। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, लखनऊ में दो दिवसीय आई. पी. एम. ओरिएंटेशन एच. आर. डी. कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। रीजनल सेन्ट्रल आई. पी. एम. सेंटर के प्रभारी डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह तथा कार्यालय के अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह ने कहा कि किसानों द्वारा फसलों को कीट एवं बीमारियों से बचाने के लिए रासायनिक कीटनाशकों का अनुचित एवं अंधाधुंध प्रयोग किया जा रहा है। रासायनिक कीटनाशक हर किसी के स्वास्थ्य के साथ – साथ पर्यावरण के लिए भी बेहद नुकसानदेह है। इसलिए जरुरी है कि कृषकों को प्रेरित किया जाये, जिससे किसान एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन को अपनाएं तथा आई. पी.एम. के अंतर्गत आने वाले अन्य तकनीकी के साथ जैविक कीटनाशकों के प्रयोग पर जोर दें और केन्द्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति द्वारा संस्तुत रासायनिक कीटनाशक को ही अंतिम विकल्प के तौर पर उपयोग में लायें।
आरसीआईपीएमसी के प्रभारी अधिकारी ने कहा कि समस्त प्रशिक्षणार्थियों को मास्टर ट्रेनर बनाने हेतु इस कार्यक्रम को आयोजित किया जा रहा है और अपने तैनाती क्षेत्र में कृषि रक्षा के लिए आई.पी.एम. को बढ़ावा देने हेतु किसानों में जागरूकता पैदा कर आई.पी.एम. अपनाने के लिए अन्नदाताओं को प्रेरित करें। कार्यक्रम में बिजेंद्र सिंह, सहायक निदेशक ने सर्वेक्षण एवं निगरानी विषय पर जानकारी प्रदान किया। सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी अमित सिंह द्वारा एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन (आई.पी.एम.) की संकल्पना, सिद्धांत तथा आई.पी.एम. के अवयव के बारे में जानकारी प्रदान की गयी।
डॉ. राहुल सुतार, ए.पी. पी. ओ. ने आई. पी. एम. के अंतर्गत आने वाली विधियों जैसे शस्य क्रियाएं तथा धर्म राज सिंह ने यांत्रिक प्रबंधन के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान किया। डॉ. केशवामूर्ति ने ट्राईसाईक्लाजोल तथा बुप्रोफेजिन रासायनिक कीटनाशकों के सुरक्षित एवं उचित उपयोग से सम्बंधित एस ओ पी के बारे में जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम के प्रथम दिन के. पी. पाठक, वनस्पति संरक्षण अधिकारी, प्रवीण चंद्रा, वैज्ञानिक सहायक तथा केंद्र के अन्य अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को ट्राईकोग्रामा लैब का भ्रमण कराया गया तथा लैब से सम्बंधित प्रायोगिक जानकारी प्रदान की गयी। कार्यक्रम का संचालन अमित सिंह, सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी द्वारा किया गया।