अब स्वास्थ्य केन्द्र और अस्पताल निर्माण के लिए भूमि क्रय की जा सकेगी

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-स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय

लखनऊ, 17 जून (हि.स.)। प्रदेश की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के स्वास्थ्य उप-केन्द्रों, प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के साथ ही 50, 100 और 200 बेड के चिकित्सालयों समेत अन्य चिकित्सा इकाइयों के भवन निर्माण के लिए निःशुल्क में उपयुक्त भूमि नहीं मिलने पर भूमि का क्रय किया जा सकेगा। इस सम्बन्ध में शासन की तरफ से शुक्रवार को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

वर्तमान में प्रभावी नीति के अनुसार स्वास्थ्य उपकेन्द्रों, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, 50, 100, 200 बेड वाले अस्पतालों समेत अन्य चिकित्सा इकाइयों के भवन निर्माण के लिए भूमि निःशुल्क प्राप्त की जाती है। भूमि को क्रय करने का कोई प्राविधान नहीं है। निःशुल्क भूमि उपलब्ध न मिलने से भवनों का निर्माण प्रायः समय से नहीं हो पाता। कई बार निःशुल्क भूमि अनुपयुक्त स्थान पर मिलने से जनता को चिकित्सा सुविधाओं का बहुत सीमित मात्रा में ही लाभ मिल पाता है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया।

शासन की तरफ से भूमि की उपयुक्तता के सम्बन्ध में मानक भी निर्धारित किये गये हैं। इसके अनुसार स्वास्थ्य उपकेन्द्र के लिए भूमि ग्राम पंचायत की तरफ से घोषित आबादी क्षेत्र से अधिकतम 100 मीटर की दूरी पर सुगम मार्ग पर स्थित होनी चाहिए। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के लिए भूमि सम्बन्धित स्थानीय निकाय द्वारा घोषित आबादी क्षेत्र से अधिकतम 500 मीटर की दूरी पर स्थित होनी चाहिए।

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के लिए भूमि विकास खण्ड मुख्यालय अथवा किसी महत्वपूर्ण कस्बे, जैसी भी स्थिति हो, उससे अधिकतम एक किलो मीटर के दायरे में स्थित होनी चाहिए। जिला अस्पताल और 50 से 200 बेड के अस्पताल की भूमि सम्बन्धित नगर निगम, नगर पालिका परिषद द्वारा घोषित आबादी क्षेत्र से अधिकतम दो किलो मीटर की परिधि में सुगम मार्ग पर स्थित होनी चाहिए।

अस्पतालों के निर्माण के लिये भूमि की उपलब्धता के सम्बन्ध में वरीयता क्रम के अनुसार कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। इसके तहत सबसे पहले ग्राम समाज की सरकारी उपयुक्त भूमि निःशुल्क प्राप्त करने का प्रयास किया जायेगा। उस पर चिकित्सालय, स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण किया जायेगा।

यदि दान में उपयुक्त भूमि प्राप्त होती है, तो उस पर चिकित्सालय, स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण कराया जायेगा। दानदाता की इच्छानुसार चिकित्सालय, स्वास्थ्य उपकेन्द्र पर उसका या उसके परिजन के नाम का शिलापट्ट भी लगाया जा सकेगा। दान में मिली भूमि पर निर्माण तभी प्रारम्भ किया जायेगा, जब दानदाता की तरफ से नियमानुसार गिफ्ट डीड हस्ताक्षरित कर दी जायेगी।

यदि कोई व्यक्ति सरकारी निःशुल्क भूमि के बदले अपनी उपयुक्त भूमि निःशुल्क प्रदान करता है तो उसके अथवा परिजन के नाम का शिलापट्ट भी लगाया जा सकेगा। अपनी भूमि देने वाले व्यक्ति को कोई स्टाम्प ड्यूटी नहीं देनी होगी। दान में प्राप्त भूमि पर निर्माण तभी प्रारम्भ किया जायेगा, जब दानदाता नियमानुसार गिफ्ट डीड पर हस्ताक्षर कर देगा। भवन हेतु दान में उपयुक्त भूमि प्राप्त न होने पर स्वास्थ्य उपकेन्द्र, चिकित्सालय के लिए नियमानुसार आपसी सहमति से उपयुक्त भूमि का क्रय, अधिग्रहण किया जायेगा। इस सम्बन्ध में राजस्व विभाग द्वारा समय-समय पर निर्गत शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। उपयुक्त भूमि का अधिग्रहण करने का निर्णय जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुति करेगी कि दान में या सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है। इस पर शासन अंतिम विकल्प के रूप में भूमि क्रय करने की मंजूरी देगा।