गोरखपुर, 17 मार्च (हि.स.)। होली पर्व के मौके पर गोरखपुर के नरसिंह शोभायात्रा की अगुवाई करने वाले गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ अब इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन इस परंपरा की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक रहे नानाजी देशमुख ने की थी। कालांतर में नरसिंह शोभायात्रा की अगुवाई गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर करने लगे। इस परंपरा का निर्वहन अब योगी आदित्यनाथ के जिम्मे है। स्थानीय लोगों के मुताबिक महानगर स्थित साहबगंज से इसकी शुरुआत वर्ष 1944 में हुई थी, जो अब भी हर वर्ष अनवरत जारी है।
बता दें कि शुरुआत में गोरखपुर में होली के त्योहार में कीचड़ का प्रयोग होता था। हुड़दंग करने वालों की भी कमी नहीं थी। बावजूद इसके लोगों में उत्साह दिखता था, लेकिन महिलाएं और बच्चे सहमे-सहमे ही घरों से बाहर निकलते थे। उन्हें हुड़दंगियों से भय लगता था, लेकिन नानाजी देशमुख ने अपने गोरखपुर प्रवास के दौरान इस परंपरा को नया रूप दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सक्रिय भागीदारी से इसका स्वरूप बदला तो लोगों की भागीदारी भी बढ़ी। महिलाओं ने भी इसमें रुचि दिखानी शुरू की। बच्चे भी उल्लसित भाव से होली का आनंद लेने लगे। देखते ही देखते इस आयोजन में लोगों की आस्था जुड़ गई और अब यह उल्लास, उमंग और विश्वास का संगम बन गया है। हुड़दंगियों की फौज भी इस परंपरा को मनाने में साथ देना शुरू कर दिया।
घंटाघर से होती है शुरुआतः होली के दिन भगवान नरसिंह की शोभायात्रा घंटाघर चौराहे से शुरू होती है। जाफरा बाजार, घासी कटरा, आर्य नगर, बक्शीपुर, रेती चौक और उर्दू होते हुए घंटाघर पर ही जाकर समाप्त भी होती है। होली के दिन की इस शोभायात्रा से एक दिन पहले घंटाघर से ही होलिका दहन शोभायात्रा भी निकाली जाती है। इसमें भी गोरक्षपीठाधीश्वर परंपरागत रूप से शामिल होते हैं। इस साल योगी की अगुआई में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड जीत के बाद होने वाले होली के इस आयोजन का रंग स्वाभाविक रूप से और चटख होने लगा है। पार्टी के अलावा लोगों में भी इसको लेकर बहुत उत्साह दिख रहा है।