कोरोना वैक्सीन निर्माण : मानव परीक्षण के लिए संत यति महाराज ने खुद का शरीर किया प्रस्तुत

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  • प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जताई अपना शरीर देने की इच्छा

गाजियाबाद :- बहुत से संत या भले लोग अपने को किसी परीक्षण के लिए मरणोपरांत दान देते हैं लेकिन गाजियाबाद के एक संत ने लीक से हटकर एक नई परम्परा को जन्म दिया है जो चर्चा का विषय बनी हुई है। जी हां, यह संत हैं अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक एवं फायर ब्रान्ड हिन्दू संत यति नरसिंहानन्द महाराज। जिन्होंने वैश्विक महामारी कोरोेना वैक्सीन निर्माण को मानव परीक्षण के लिये अपना शरीर वैज्ञानिकों को देने की इच्छा व्यक्त की है।

संत यति नरसिंहानन्द का कहना है की वे दधीचि परपरा से जुड़े हैं जिन्होंने मानव कल्याण के लिए जिन्दा रहते हुए अपना शरीर छोड़ा था इसी परम्परा को वह आगे बढ़ा रहे हैं । इसको लेकर स्वामी यति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन को पत्र लिखा है। पत्र में यति महाराज ने कहा कि यदि इस महान कार्य में मेरे शरीर का प्रयोग किया जाता है तो मेरे लाखों शिष्य तथा सनातन धर्म के अन्य करोड़ों अनुयायी इससे प्रेरणा लेंगे और भविष्य में कभी भी इस तरह के महान उद्देश्य के लिए मानव शरीर की कमी नहीं होगी। यह मानव कल्याण के लिए एक महान कार्य होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से इस अनुरोध को स्वीकार करने और अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

उल्लेखनीय है कि भारत के अनेक शोध संस्थान वैश्विक महामारी कोरोना की दवा खोजने में लगे हुए हैं। इस कार्य के लिये मानव परीक्षण भी होना है। समाज सेवी डॉ.राजकुमार चौधरी कहते हैं कि वास्तव में स्वामी यति ने संतों वाला काम किया है आज देश को मानव कल्याण के लिए ऐसी सोच रखने वाले संतों की जरूरत है।