सरस जनवाद

12000 करोड़ की लागत से 2021 में होने वाली देश की 16वीं जनगणना बनेगी ‘डिजिटल जनगणना’, खास मोबाइल ऐप का होगा इस्तेमाल

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नई दिल्ली। सोमवार को दिल्ली में जनगणना भवन की आधारशिला रखने के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कई अहम खुलासे किए। अमित शाह ने इस दौरान कहा कि जनगणना की पूरी बिल्डिंग ग्रीन होगी, भारत में ग्रीन बिल्डिंग के कॉन्सेप्ट को अपनाने की जरूरत है। नई जनगणना का ब्योरा इसी बिल्डिंग के माध्यम से रखा जाएगा।

जनगणना भवन के शिलान्यास के मौके पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में पहली बार 2021 की जनगणना डिजिटल तरीके से होगी। इसके लिए केंद्र सरकार एक खास एंड्रायड मोबाइल ऐप विकसित करवा रही है। उन्होंने सभी जरूरी नागरिक सुविधाओं के लिए एक यूनिवर्सल कार्ड लाने के संकेत भी दिए। 

अमित शाह ने कहा, “सरकार इस बार की जनगणना में अभी तक का सबसे ज्यादा व्यय करने जा रही है। हम इस बार की जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने में करीब 12 हजार करोड़ रुपये खर्च करने जा रहे हैं। तकनीक के आधुनिक रूप का उपयोग करते हुए 2021 में डिजिटल तरीके से जनगणना की जाएगी।” केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि 2014 में मोदी सरकार आई तो हमारे सोचने की क्षमता में बदलाव आया। यहीं से जनगणना के रजिस्टर के सही उपयोग की शुरुआत हुई। इसका सबसे बड़ा उदाहरण उज्ज्वला योजना है।

शाह के मुताबिक, 2021 की जनगणना में पहली बार नेशनल पॉपुलेश रजिस्टर (एनपीआर) तैयार किया जा रहा है। एनपीआर देश में विभिन्न सरकारी समस्याओं को सुलझाने में मदद करेगा। साथ ही पहली बार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित आंकड़ों को जनगणना में शामिल किया जाएगा। डिजिटल जनगणना में 12 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

अमित शाह ने आगे कहा, ‘जनगणना कोई बोरिंग काम नहीं होता है। इससे सरकार को अपनी स्‍कीम लोगों के लिए लागू करने में मदद मिलती है। राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर (NPR) कई मुद्दों को सुलझाने में सरकार की मदद करता है। ये देश के इतिहास में पहली बार होगा, जब जनगणना का काम एप के जरिए होगा।

उन्होंने कहा कि “पेपर जनगणना से डिजिटल जनगणना का transformation होने का काम 2021 की जनगणना के बाद समाप्त होगा। जनगणना का डिजिटल डाटा उपलब्ध होने से अनेक प्रकार के विश्लेषण के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं।”