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शाबाश : आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए मृतक के भाई ने शवदाह से किया इंकार, मऊ थाना प्रभारी ने खुद दी मुखाग्नि

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फर्रुखाबाद। यूँ तो पुलिस अपनी कारगुज़ारी के लिए हमेशा से चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार मउ से जो खबर निकलकर सामने आ रही है उसमें यूपी पुलिस का एक अलग ही चेहरा दिखाई पड़ रहा है। मऊ पुलिस ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक ऐसे युवक का शवदाह किया है जिसका खुद का सगा भाई आर्थिक तंगी का हवाला देकर उसके अंतिम वक़्त में उसके काम ना आ सका। निश्चित तौर पर फर्रुखाबाद पुलिस के इस कार्य के बाद वहां की जनता को अपने रक्षक दल पर गर्व महसूस होगा।

दरअसल मामला थाना क्षेत्र के मोहल्ला टाउनहाल का है जहां सोनू बाथम (पुत्र स्व. रामबाबू बाथम) काफी दिनों से बीमार चल रहा था जिसके चलते उसके पड़ोसी द्वारा उसे इलाज के लिए लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान बुधवार को उसकी मौत हो गई। अस्पताल द्वारा उसकी मौत की सूचना थाना पुलिस को दी गई। पुलिस ने पंचनामा भरकर उसका पोस्टमार्टम कराया। उसके साथ ही मृतक सोनू के छोटे भाई बाथम को फोन से अंतिम संस्कार करने के लिए पुलिस ने बुलाया, लेकिन उसने आने से साफ मना कर दिया।

जानकारी के मुताबिक़ शव विच्छेदन गृह पर सोनू के रिश्तेदार भी थे। पुलिस ने जब रिश्तेदारों से शव को लेने के लिए कहा तो उन्होंने मना कर दिया। इस पर पोस्टमार्टम हाउस से पुलिसकर्मियों ने प्रभारी निरीक्षक को जानकारी दी जिसके बाद प्रभारी निरीक्षक विनय प्रकाश राय पोस्टमार्टम गृह पहुंचे और सोनू के शव को अंतिम संस्कार के लिए पांचाल घाट के शमशान घाट पर ले गए।

इंस्पेक्टर विनय प्रकाश राय

इससे पहले पुलिस ने लोगों से नम्बर लेकर कई मृतक के दूसरे रिश्तेदारों को उसकी सूचना दी, लेकिन कोई भी अंतिम संस्कार करने नहीं आया। यह देख थानाध्यक्ष डॉक्टर विनय प्रकाश राय ने कुछ स्थानीय लोगों को बुलाया और अतिंम संस्कार करने में सहयोग की मांग की। उसके बाद पोस्टमार्टम हाउस से शव को पांचाल घाट गंगा तट पर जाकर एक परिवार के सदस्य की तरह उसकी चिता सजाई और हिन्दू रीति रिबाज से उसका अंतिम संस्कार किया। वहां पर मौजूद लोगों ने इंस्पेक्टर की जमकर तारीफ की।

इस तरह इस पूरे मामले में यूपी पुलिस का एक अलग चेहरा इंस्पेक्टर विनय प्रकाश राय ने सबके समक्ष प्रस्तुत किया, जिसकी सराहना पूरे क्षेत्र में हो रही है।