बरनाला उपचुनाव में 12 साल बाद कांग्रेस की वापसी, बगावत से AAP को झटका

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पंजाब की बरनाला विधानसभा सीट पर हाल ही में हुए उपचुनाव के परिणाम घोषित हो गए हैं, जिसमें कांग्रेस के उम्मीदवार कुलदीप सिंह काला ढिल्लों ने शानदार जीत हासिल की है। मतगणना की प्रक्रिया बरनाला के एसडी कॉलेज में सुबह 8 बजे से प्रारंभ हुई, जहां पहले राउंड के दौरान आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार ने बढ़त बनाई। हालांकि, अंत में आम आदमी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, जो उनके गढ़ के रूप में जाना जाता है। कुलदीप सिंह को 28,254 वोट मिले, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी, आम आदमी पार्टी के हरिंदर सिंह धालीवाल को 26,097 वोट मिले। इस चुनाव में बीजेपी के केवल सिंह ढिल्लों को 17,958 और स्वतंत्र उम्मीदवार गुरदीप बाठ को 16,899 वोट प्राप्त हुए।

कांग्रेस की जीत का अंतर 2,157 मतों का रहा, जो इस बात को स्पष्ट करता है कि आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव कितने महत्वपूर्ण थे। दिलचस्प बात यह है कि गुरदीप बाठ, जो पहले आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार थे, ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 16,899 वोट प्राप्त किए, जिसका सीधा असर मुख्यधारा की पार्टी की हार पर पड़ा। बाठ को टिकट न मिलने के चलते आम आदमी पार्टी के कई समर्थक उनके साथ चले गए, जिसके कारण पार्टी को यह नुकसान उठाना पड़ा। यह माना जा रहा है कि बाठ की अनदेखी ने आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ी बाधा उत्पन्न की।

2017 और 2022 में इस क्षेत्र का नेतृत्व करने वाले गुरमीत सिंह मीत हेयर, जो आम आदमी पार्टी के विधायक रहे, के सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हुई थी। मीत हेयर ने संगरूर से लोकसभा चुनाव में सफलता हासिल की, इसके परिणामस्वरूप बरनाला सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा। यह सीट निर्दयी रूप से आम आदमी पार्टी का गढ़ रही है, क्योंकि वे 2014 के बाद से इस जिले में एक भी चुनाव नहीं हारे हैं। इससे पहले, मीत हेयर के नेतृत्व में 2017 और 2022 में आयोजित विधानसभा चुनावों में भी पार्टी ने जीत हासिल की थी।

बरनाला में 20 नवंबर को हुए मतदान में 56.3 प्रतिशत की भागीदारी रही, जिसमें कुल 99,956 मत पड़े। इनमें से 53,489 मतदाता पुरुष, 46,465 महिला और 2 अन्य थे। यह आंकड़ा दिखाता है कि स्थानीय लोगों ने इस उपचुनाव में अपनी भागीदारी के प्रति गंभीरता दिखाई। इस प्रकार, केवल मतदाता भागीदारी में नहीं, बल्कि परिणामों में भी यह साफ है कि कांग्रेस ने यहां अपनी स्थिति मजबूत की है।

उपचुनाव के परिणाम ने कांग्रेस को एक नई ऊर्जा दी है, जबकि आम आदमी पार्टी को अपने भीतर की राजनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। इससे पार्टी को इस जगह के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की बाहरी नाराजगी को समझने का भी एक अवसर मिलता है, ताकि आगे चलकर ऐसे परिणामों से बचा जा सके। कुल मिलाकर, यह चुनाव एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है, जो अगले चुनावों की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।