ईमानदारी का रहस्य: केंद्रीय एडिशनल डायरेक्टर जनरल के सबक का खुलासा!

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अमृतसर से मिली जानकारी के अनुसार, लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एलपीआई) के अध्यक्ष आदित्य मिश्रा की पहल पर भारतीय केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार आईसीपी अटारी में एक महत्वपूर्ण सतर्कता जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में मुख्य भूमिका आईसीपी के मैनेजर सूरज भान हांडा ने निभाई। इस समागम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय विजिलेंस ब्यूरो के वित्त मंत्रालय की एडिशनल डायरेक्टर जनरल रानू मुखर्जी उपस्थित रहीं।

सेमिनार की शुरुआत में मुखर्जी का स्वागत एपीएआई और बीएसएफ के अधिकारियों द्वारा फूलों के गुलदस्ते से किया गया। फिर, उन्होंने इस सेमिनार में भाग लिया, जो कि रिश्वत निवारण पर केंद्रित था। इस अवसर पर उन्होंने सभी अधिकारियों को ईमानदारी के साथ अपनी ड्यूटी निभाने का संदेश दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुरुष और महिलाएं दोनों ही अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। रानू मुखर्जी ने अधिकारियों को विश्वास दिलाया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान देश के प्रति अपनी निष्ठा और संकल्पित सेवा में किसी भी प्रकार की कमी नहीं कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम में अन्य कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों ने भी भाग लिया। जैसे कि एडीजी (सतर्कता) सीबीडीटी उत्तर क्षेत्र की ललिता कुमारी, अतिरिक्त सीआईटी स्वप्न बंदोपाध्याय, और प्रतीक गुरदित्ता, जो सतर्कता सेल का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। साथ ही नंदिनी सिंह जैसे अन्य अधिकारियों की उपस्थिति ने इस समागम को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।

सेमिनार के समापन के बाद, रानू मुखर्जी ने दरबार साहिब जाकर माथा टेककर अपनी श्रद्धा अर्पित की। यह न केवल उनकी धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत करता है कि वे मानवता और सेवा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से ले रहीं हैं। इस प्रकार का कार्यक्रम न केवल अधिकारियों के लिए एक जागरूकता स्रोत था, बल्कि यह समाज में ईमानदारी और नैतिकता को बढ़ावा देने का भी कार्य करता है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत मुहिम है।

समग्र रूप से, यह सेमिनार इस बात का प्रतीक है कि कैसे सरकारी अधिकारी और संस्थाएं एक संकल्पित प्रयास के माध्यम से अपने कार्यों में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे अंततः समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सकेगा।