संगरुर में प्रीगैबलिन कैप्सूल बैन: नशे के चलते जिला मजिस्ट्रेट का सख्त आदेश!

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पंजाब के संगरूर में जिला मजिस्ट्रेट अमित बांबी ने प्रीगैबलिन कैप्सूल की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले के तहत सभी मेडिकल स्टोर मालिकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अगर किसी भी रूप में प्रीगैबलिन 75mg कैप्सूल की बिक्री की गई, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश में शामिल दिशा-निर्देशों के अनुसार, केमिस्टों को दवा वितरण करते समय पर्ची पर अपनी मुहर लगाने के साथ ही दवा देने की तारीख भी लिखने की आवश्यकता होगी।

जिला मजिस्ट्रेट ने इस आदेश के संदर्भ में कहा है कि सिविल सर्जन द्वारा उनके कार्यालय को सूचित किया गया था कि प्रीगैबलिन कैप्सूल का दुरुपयोग आम जनता में बढ़ रहा है। इसे ‘सिग्नेचर’ नाम से भी जाना जाता है, जिसका कई लोग नशे के उद्देश्य से सेवन कर रहे हैं। दवा के अनुचित उपयोग के कारण, सिविल सर्जन ने इसके वितरण पर रोक लगाने का अनुरोध किया था, जिसे अब स्वीकार करते हुए जिला मजिस्ट्रेट ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

यह प्रतिबंध केवल तत्काल प्रभाव से लागू नहीं है, बल्कि इसके तहत सुनिश्चित किया गया है कि यह निषेधाज्ञा 8 जनवरी 2025 तक प्रभावी रहेगी। इस प्रकार, संगरूर जिला प्रशासन एक सख्त रवाइड अपनाते हुए नशे के दुष्प्रभावों से समाज को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहा है। यह कदम स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

जनता में जागरूकता लाने के लिए भी इस आदेश का महत्व है। न केवल मेडिकल स्टोर मालिकों के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी यह समझना जरूरी है कि प्रीगैबलिन जैसे दवाओं का दुरुपयोग स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। ऐसे प्रतिबंधों का उद्देश्य न केवल दवा के अनुचित उपयोग को रोकना है, बल्कि इसके माध्यम से लोगों को सही जानकारी और दिशा-निर्देश प्रदान करना भी है, ताकि वे सुरक्षित और स्वस्थ रह सकें।

यह स्थिति न केवल संगरूर, बल्कि समस्त पंजाब में दवा के दुरुपयोग से निपटने के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करती है। प्रीगैबलिन कैप्सूल का इस तरह का दुरुपयोग एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है, और जिला प्रशासन की यह पहल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। अब देखना होगा कि इस प्रतिबंध का समाज में क्या प्रभाव पड़ता है और इससे नशे की आदतों को नियंत्रित किया जा सकेगा।