पंजाब के बठिंडा जिले के रायके कलां गांव में धान की खरीद में हो रही देरी के कारण सोमवार रात को किसानों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। इस दौरान, किसानों ने तहसीलदार और खरीद निरीक्षक को बंधक बना लिया। जब इस घटना की जानकारी पुलिस को मिली, तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया लेकिन कुछ किसानों ने पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। अंततः, पुलिस को स्थिति को सँभालने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। घटनास्थल पर भारतीय किसान यूनियन के नेताओं के खिलाफ दो मामले भी दर्ज किए गए हैं।
किसानों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि धान की नमी की जांच के बिना उनकी फसल की खरीद करने से इंकार किया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। सोमवार को लगभग 20-25 किसान मंडी में इकट्ठा हुए थे और इसके बाद तहसीलदार और खरीद निरीक्षक को बंधक बना लिया गया। जैसे ही स्थिति गंभीर हुई, पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कुछ किसान उग्र हो गए और पथराव शुरू कर दिया, जिसके बाद पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा।
किसानों का स्पष्ट कहना है कि नमी की जांच के नाम पर उनकी फसल की खरीद में देरी की जा रही है, जिससे उनकी फसल खराब हो सकती है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि खरीद की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और नमी की जांच के बिना भी उनकी फसल की खरीद की जाए। इस घटना के बाद अन्य किसान संगठनों ने भी बठिंडा में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंधेर ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है और मुख्यमंत्री भगवंत मान बड़े धनी परिवारों के साथ मिलकर किसानों की चुनौतियों का लाभ उठाना चाह रहे हैं।
स्थानिक सांसद हरसिमरत कौर ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब मंडी में फसल बेचने गए किसानों पर पुलिस ने लाठियां चलाई हैं। उनका आरोप है कि पंजाब सरकार किसानों की समस्याओं को सुलझाने के बजाय उन पर बल प्रयोग कर रही है। इसी तरह, अकाली दल यूथ के राष्ट्रीय सचिव सर्बजीत सिंह ने भी इस लाठीचार्ज को निंदनीय बताया और कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं को हल करने की बजाय उन पर बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है।
राज्य में किसानों और प्रशासन के बीच इस प्रकार की घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि कृषि क्षेत्र में समस्याएँ और तनाव बढ़ता जा रहा है। किसानों का मानना है कि बिना उचित समाधान के उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है, और सरकार को इस दिशा में तुरंत प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।