बरनाला में पंजाब स्टूडेंट यूनियन ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के खिलाफ एक जोरदार विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने आप सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर के निवास के बाहर टेंट लगाकर धरना दिया। इस मौके पर रंजीत सिंह, कमलदीप कौर, सुखदीप सिंह और अरविंदर आजाद जैसे नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे आज दो महत्वपूर्ण मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं।
उनकी पहली मांग यह है कि शिक्षा को राज्यों का विषय बनाया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने 2020 में नई शिक्षा नीति लाकर पूरे देश की शिक्षा प्रणाली को एक सूत्र में बांधने का जो प्रयास किया है, वह गलत दिशा में है। उन्होंने तर्क किया कि भारत के विभिन्न राज्यों की भौगोलिक और सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियाँ अलग-अलग हैं, इसलिए शिक्षा नीति भी राज्यों की आवश्यकता के अनुसार अलग होना चाहिए। यह आवश्यक है कि हर राज्य की शिक्षा प्रणाली उसके विशेष हालात और जरूरतों के अनुरूप विकसित की जाए।
दूसरी मांग पंजाब में सरकारी नौकरियों में 90% कोटा पंजाबियों के लिए सुनिश्चित करने की है। प्रदर्शनकारियों ने निराशा व्यक्त की कि पंजाब के निवासी सरकारी नौकरी पाने में असफल हो रहे हैं, जबकि दूसरे राज्यों के लोग यहाँ की सरकारी नौकरियों पर आसानी से कब्जा करने में सफल हो रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि हरियाणा और कर्नाटक की सरकारों ने पहले ही अपने लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए संसद में कानून पारित कर दिए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी याद दिलाया कि जब भगवंत मान मुख्यमंत्री नहीं बने थे, तब उन्होंने पंजाब के बिजली विभाग में बाहरी लोगों को नौकरी देने के खिलाफ अपने विचार व्यक्त किए थे। उस समय उन्होंने आश्वासन दिया था कि यदि वे सत्ता में आएंगे, तो इस विषय पर एक ठोस कानून बनाएंगे। परंतु, अब ढाई साल का समय बीत जाने के बाद भी आम आदमी पार्टी की सरकार ने इस दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है।
पंजाब स्टूडेंट यूनियन ने यह स्पष्ट किया कि वे अपने इन मुद्दों को उठाने के लिए लगातार पंजाब के उपचुनाव वाले क्षेत्रों में प्रदर्शन कर रहे हैं। यदि आम आदमी पार्टी की सरकार इन मांगों पर गौर नहीं करती, तो वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने से भी हिचकेंगे नहीं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यह उनका अंतिम संघर्ष हो सकता है और वे उन उपायों को अपनाने में संकोच नहीं करेंगे, जो उनकी आवाज को सरकार तक पहुँचाने के लिए आवश्यक हैं।
यह विरोध प्रदर्शन यह दर्शाता है कि पंजाब के युवा अपनी मांगों के प्रति जागरूक हैं और वे अपने हितों की रक्षा के लिए दृढ़ हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या राज्य सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देगी और किस तरह से इस मुद्दे का समाधान निकलेगा।