बरसात से पहले करें नाला सफाई कार्य : मुख्य सचिव - सरस जनवाद

बरसात से पहले करें नाला सफाई कार्य : मुख्य सचिव

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29HREG402 बरसात से पहले करें नाला सफाई कार्य : मुख्य सचिव

गोरखपुर, 29 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने सोमवार को मंडलायुक्त रवि कुमार एनजी तथा मंडल के जिलाधिकारियों के साथ वीडीओ कांफ्रेंसिंग कर बरसात से पहले नालों की सफाई समेेत संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन के निर्देश दिए। गोरखपुर मंडल आयुक्त सभागार में रवि एन जी और जिलों में स्थापित एनआईसी हाल में जिलाधिकारियों ने बैठक में शिराकत की।

इस दौरान मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने गोरखपुर समेत सभी जिलों के नाला सफाई सम्बन्धी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नाला सफाई से जुड़ी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद करना शुरू कर दें। बरसात से पूर्व इससे जुड़ी तैयारियां हर हाल में पूरी कर ली जाएं। बरसात के दौरान जलजमाव की स्थिति नहीं उत्पन्न होनी चाहिए।

महराजगंज के जिलाधिकारी ने मुख्य सचिव से महाव नाला से जुड़ी समस्याओं की जानकारियां साझा की। उन्होंने बताया कि महाव सफाई पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में लगभग 38 किमी लम्बाई में फैली है। इसके तल की चौड़ाई 18 से 20 मीटर है। जबकि भारत की सीमा में अर्थात महराजगंज में महाव नाला की कुल लम्बाई 23 किमी है। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि वनक्षेत्र के बाहर 15 किमी की लम्बाई में महाव के तल की चौड़ाई 15 से 18 मीटर तक ही है। वनक्षेत्र के अन्तर्गत 08 किमी की लम्बाई में पुनरस्थापना अथवा सफाई का कार्य न होने के कारण तली की चौड़ाई अब महज 04 से 06 मीटर तक ही बची है। महाव नाले पर कोई तटबंध भी नहीं है। इससे समस्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इसके स्थाई समाधान पर विचार और क्रियान्वयन आवश्यक है।

वर्षा काल में बढ़ जाति है समस्या

महराजगंज के जिलाधिकारी ने मुख्य सचिव को बताया कि बारिश के दौरान महाव नाला से वनक्षेत्र में पानी का निकास अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे में नाले का जलस्तर बढ़ने लगता है। बाढ काल के दौरान प्रतिवर्ष जल प्लावन की समस्या आती है और वन्य क्षेत्र एवं फसली भूमि क्षतिग्रस्त होती है। कुछ तहसील के अन्तर्गत पानी फैलने से नुकसान भी होता है।

14 ग्राम पंचायतों की 690 हेक्टेयर भूमि व फसलें होतीं हैं प्रभावित

जिलाधिकारी ने बताया कि निकटवर्ती क्षेत्र में महाव नाला से होने वाली क्षति के चपेटे में 14 ग्राम पंचायतें आतीं हैं। इन गाँवों में 690 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होती है। प्रशासनिक स्तर पर विगत 20 वर्ष से भी अधिक समय से समस्या का निराकरण नहीं हो पा रहा है। प्रशासन समस्या का निदान सही तरीके से कर दे तो महाव नाला से आने वाले पानी से होने वाले नुकसान की समस्या का समाधान हो सकता है। मुख्य सचिव ने स्थाई समाधान के लिए शासन स्तर पर उचित निष्कर्ष निकालने का आश्वासन दिया।