09HREG79 आर्य समाज के निर्माण में आचार्य रामदेव का विशेष स्थानः प्रो. शतांशु
हरिद्वार, 9 दिसंबर (हि.स.)। गुरुकुल कांगडी समविश्वविद्यालय में आचार्य रामदेव के निर्वाण दिवस को चिंतन दिवस के रूप में मनाया गया। महिला शिक्षा की उन्नति का केन्द्र आर्य समाज रहा है तथा उसके आधुनिक शिल्पी रहे आचार्य रामदेव की पुण्य तिथि पर माता लालदेई यज्ञशाला में आयोजित यज्ञ के उपरान्त आचार्य स्वामी रामदेव के जीवन के संस्मरणों पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त कर उन्हें श्रद्वा-सुमन अर्पित किये।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. सोमदेव शतान्शु ने कहा कि आर्य समाज के भव्य निर्माण में आचार्य रामदेव का अपना विशेष स्थान है। भारत के गौरवमयी अतीत के आचार्य रामदेव चित्रकार थे। स्वाध्याय प्रेमी तथा सिद्धांतवादी आचरण के कारण 1917 में गुरुकुलीय पाठयक्रम में वेद, विज्ञान, साहित्य, अंग्रेजी जैसे आज के आधुनिक विषयों को समाहित करने का श्रेय आचार्य रामदेव को है। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष का इतिहास जैसी उनकी स्वयं लिखित पुस्तक का अध्ययन करने से अनेक गौरवशाली परम्पराओं से रूबरू होने का अवसर प्राप्त होता है। अपने अंतिम दिनों में भी आचार्य रामदेव गुरुकुल शिक्षा के प्रचार प्रसार मंे लगे रहे।
कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने कहा कि गुरुकुल संस्कारों का सृजन करने वाला विश्वविद्यालय है। शिक्षक समाज की जागृति का प्रबल पक्षधर होता है। शिक्षक अपने स्वतंत्र विचार से समाज की मूल भावनाओं से जुड़ता है तथा बेहतर जीवन यापन की विद्याओं से जनसामान्य को परिचित कराता है।