अयोध्या : नंदी के सहारे खेती करने वाले 50 किसानों का हुआ सम्मान, दृश्य ऐसा मानो पुरानी कृषि परंपरा लौट आई हो

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अयोध्या, 18 अक्टूबर । राम नगरी अयाेध्या में लक्ष्मी सागर सरोवर का तट रविवार को खेती-किसानी की सांस्कृतिक विरासत का गवाह बना। ट्रैक्टर के शोर के बीच हल की लकीर खींचने वाले 50 नंदी पालक किसानों को जब मंच पर बुलाया गया तो पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। हैरिंग्टनगंज के मुकीमपुर शाहगंज में श्रीराम सेवा एवं शोध संस्थान की ओर से नंदी पालक कृषक सम्मान समारोह आयोजित हुआ। हलधर किसान अपने नंदी-बैलों के साथ पहुंचे थे, जिनके गले में घंटियां और माथे पर टीका लगा था। दृश्य ऐसा मानो द्वापर-त्रेता की कृषि परंपरा लौट आई हो।

सभी 50 किसानों को 1100 रुपये का चेक, अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गौ सेवा आयोग के सदस्य एवं दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री राजेश सिंह सेंगर ने मंत्रोच्चार के बीच नंदी पूजन कर किया। संस्थान के अध्यक्ष संतोष दुबे ने कहा, “बैल सिर्फ पशु नहीं, हमारे अन्नदाता के सहोदर हैं। जिस दिन खेत से बैल विदा हो जाएगा, उस दिन खेत से संस्कृति भी विदा हो जाएगी।

मुख्य अतिथि ने कहा कि बैलों से खेती भारतीय सनातन कृषि परंपरा की आत्मा है। इससे गोवंश का संरक्षण भी होता है और धरती रसायन से बचती है। उन्होंने किसानों से गोबर-गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। बुजुर्ग किसान संतराम ने बताया कि वह आज भी वह बैलों से ही खेती करते हैं। बड़ी संख्या में बैलों सहित किसानों को देखकर अतिथिगण काफी उत्साहित दिखे।

समारोह में फिल्म निर्माता रवि भाटिया, कोका-कोला के वरिष्ठ प्रबंधक अमित वाटलर, क्रेन सर्विस के मालिक चंद्रेश चौरसिया और दिल्ली स्वीट्स हाउस के मालिक गोमती प्रसाद दुबे मौजूद रहे। संस्था की ओर से चंद्रशेखर प्रताप यादव, दीपक सिंह, सत्येंद्र कुमार, शरद मद त्रिपाठी, आचार्य सुधाकर पांडे और प्रेम प्रकाश पांडे उपस्थित रहे। इस अवसर पर शाहगंज चौकी प्रभारी विपिन श्रीवास्तव अपने दलबल के साथ मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक राजेश दुबे ने किया।कार्यक्रम के अंत में संस्थान की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन मुख्य अतिथि को सौंपा गया। ज्ञापन में बैल से खेती करने वाले किसानों को 3000 रुपये मासिक प्रोत्साहन राशि दिए जाने की मांग की गई। संस्थान के अध्यक्ष संतोष दुबे ने कहा कि प्रोत्साहन राशि मिलने पर भविष्य में किसानों के पलायन को रोकने, रोड एक्सीडेंट में कमी तथा विकसित भारत के संकल्प को बल मिलेगा। मुख्य अतिथि ने आश्वासन दिया कि वे इस कार्य को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाकर नंदी पालक किसानों को प्रोत्साहन राशि दिलाने का प्रयास करेंगे।