सरस फूड फेस्टिवल में छाया उत्तरकाशी का पहाड़ी स्वाद,मोरी की सेब चटनी बनी आकर्षण

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देहरादून, 09 अक्टूबर । राजधानी देहरादून में आयोजित सरस फूड फेस्टिवल में उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र की महिलाओं के पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन और स्थानीय उत्पाद लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। जय मातृ शक्ति स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सेब की चटनी, सिद्दू, पतियुड के पकौड़े और स्थानीय कृषि उत्पादों के जरिए पहाड़ के स्वाद को बड़े बाजार तक पहुंचा रही हैं। पांच से 11 अक्टूबर तक चल रहे इस महोत्सव में 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं।

आत्मनिर्भर क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) से जुड़ी महिलाएं अपने हाथों से तैयार किए गए पारंपरिक व्यंजन बेच रही हैं। उनके स्टॉल पर सिद्दू, सेलू और उड़द की दाल के पकौड़ों के साथ अन्य स्थानीय व्यंजन उपलब्ध हैं। इन व्यंजनों को शहरवासियों और महोत्सव में आने वाले लोगों की सराहना मिल रही है।

मोरी क्षेत्र की सेब की चटनी महोत्सव में खास आकर्षण बनी हुई है। समूह की महिलाएं इसे हाथ से तैयार करती हैं और इसकी कीमत करीब 300 रुपये प्रति किलोग्राम है। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के जरिए सीधे आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।

महिलाएं तैयार व्यंजनों के अलावा उत्तरकाशी के राजमा, लाल चावल, काला तिल और भट्ट की दाल जैसे पारंपरिक कृषि उत्पाद भी बेच रही हैं। हिलान्स के माध्यम से इन उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है। समूह के मल्टीग्रेन बिस्किट भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।

जय मातृ शक्ति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष मंजू राणा ने कहा कि सरस फूड फेस्टिवल ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों और हुनर को बड़े बाजार तक पहुंचाने का अवसर दे रहा है। पहले जिन उत्पादों की बिक्री गांव और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित थी, अब उन्हें देहरादून जैसे शहर में सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के लिए संचालित योजनाओं और प्रशिक्षण से महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं। महिलाएं अपने गांवों में स्थानीय उत्पाद तैयार कर आजीविका के साधन विकसित कर रही हैं। सरस फूड फेस्टिवल में उत्तरकाशी की महिलाओं की भागीदारी स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण आजीविका और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने का माध्यम भी बन रही है।