धर्मशाला, 18 जुलाई । गांवों के विकास की कहानी अक्सर विकास खंड कार्यालयों से शुरू होती है। यहीं से सड़कें निकलती हैं, आवास योजनाएं गांवों तक पहुंचती हैं, मनरेगा के काम गति पकड़ते हैं और विकास की अनेक योजनाएं धरातल पर उतरती हैं। विडंबना यह रही कि शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के रैत विकास खंड कार्यालय ने जहां सात दशकों तक हजारों परिवारों के जीवन में बदलाव लाने का काम किया, उसके पास अपना पुराना भवन तो था लेकिन ज़मीन नहीं।
वर्ष 1958 में स्थापित रैत विकास खंड ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण इकाई रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, ग्रामीण सड़क निर्माण, सामुदायिक भवनों, सिंचाई कूल्हों तथा अन्य अनेक विकास योजनाओं का संचालन इसी कार्यालय से होता रहा। लेकिन इतने महत्वपूर्ण कार्यालय की भूमि तक विभाग के नाम दर्ज नहीं थी। प्रशासनिक प्रक्रिया की यह कमी वर्षों तक बनी रही और समय के साथ सामान्य बात मान ली गई। शाहपुर के विधायक एवं उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने अपने विधानसभा क्षेत्र में वर्षों से लंबित मामलों को प्राथमिकता देते हुए सबसे पहले इस कार्यालय की भूमि संबंधी जटिलताओं को दूर करने का निर्णय लिया।
लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद विकास खंड कार्यालय की भूमि विधिवत ग्रामीण विकास विभाग के नाम दर्ज हुई। भूमि हस्तांतरण के बाद आधुनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए भवन का प्रारूप तैयार किया गया और मुख्यमंत्री से 5.36 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद निर्माण कार्य आरंभ हुआ। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नए भवन का शिलान्यास किया और आज इसका निर्माण तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। भवन तैयार होने के बाद कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा, जबकि दूर-दराज़ के गांवों से आने वाले लोगों को एक ही परिसर में अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक ढंग से सरकारी सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। रैत विकास खंड कार्यालय का नया भवन इसी सोच का विस्तार है।