संचालन जिला सचिव विनोद प्रभाकर ने किया।
भूख हड़ताल की शुरुआत पूर्व अध्यापक नेता सुरेंद्र
सैनी, जयवीर सिंह, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान अशोक सैनी, किसान सभा
के जिला प्रधान कपूर सिंह बगला, शमशेर सिंह नम्बरदार, सर्व कर्मचारी संघ हिसार ब्लॉक
के प्रधान राजेश बागड़ी, ब्लॉक सचिव जयकुमार सिवाच, हेमसा के राज्य महासचिव हितेंद्र
सिहाग, अध्यापक संघ की राज्य उपप्रधान अलका तथा जनवादी महिला समिति की जिला सचिव बबली
लांबा ने पदाधिकारियों को मालाएं पहनाकर की।
एक दिवसीय भूख हड़ताल पर राजेश मेहरा, अशोक यादव,
संदीप मिरका, नरेंद्र लोरा, विजय कुमार, पवन कुमार, राजेंद्र दूहन, सुरेश कुमार, कृष्ण
भर्री, राजेश जागलान, सुमन देवी और रामनाथ बैठे।
इस अवसर पर वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और
हरियाणा सरकार की नीतियों से सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने
कहा कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त अध्यापकों पर भी सेवानिवृत्ति एवं सेवा संबंधी विभिन्न
शर्तें लागू की जा रही हैं। साथ ही, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों
के बावजूद अतिथि अध्यापकों को नियमित नहीं किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि अध्यापकों
से लगातार गैर-शैक्षणिक कार्य करवाए जा रहे हैं, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा
है।
अध्यापक नेताओं ने सरकार से मांग की कि शिक्षा
विभाग में कार्यरत सभी कच्चे कर्मचारियों और अध्यापकों को नियमित किया जाए तथा अध्यापकों
से गैर-शैक्षणिक कार्य लेना बंद किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों का शीघ्र
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
कार्यक्रम को सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा से संबद्ध
विभिन्न विभागीय यूनियनों के पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। इनमें चतुर्थ श्रेणी
कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान छबील दास मोलिया, दलबीर भादू , रामचंद्र चालिया, सुरेश
वर्मा, विकलांग अधिकार मंच के राज्य सचिव ऋषिकेश राजली, रामू शर्मा, विनोद फौजी, विनोद
भाटिया, मनोज जांगड़ा और सुरेंद्र शर्मा सहित अनेक कर्मचारी नेता उपस्थित रहे। जनवादी
महिला समिति की राज्य नेता शकुंतला जाखड़ ने अनशनकारियों को जूस पिलाकर सांकेतिक भूख
हड़ताल का समापन कराया।