रांची, 19 मई । झारखंड में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार तेजी से कदम उठा रही है। राज्य में वर्तमान समय में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श और सुझाव प्राप्त करने के बाद जल्द ही नई झारखंड औद्योगिक नीति लागू की जाएगी। उद्योग विभाग के सचिव अरवा राजकमल ने यह बातें कही।
उद्योग विभाग के सचिव अरवा राजकमल मंगलवार को रांची में आयोजित सरकार-उद्योग राउंडटेबल बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक का आयोजन भारतीय उद्योग परिसंघ झारखंड द्वारा सीआईआई राष्ट्रीय खनन एवं निर्माण उपकरण प्रभाग (एमसीईडी) के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योगपतियों तथा खनन एवं इस्पात क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
उद्योग सचिव ने उद्योग जगत से सुझाव साझा करने का आग्रह करते हुए कहा कि राज्य सरकार रांची में एक अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे तकनीकी नवाचार, कौशल विकास और औद्योगिक दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।
बैठक के दौरान भविष्य की खरीद आवश्यकताओं, निवेश की संभावनाओं, खदानों के आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार, सतत विकास और सप्लायर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा झारखंड में खनन, आधारभूत संरचना, विनिर्माण और नई तकनीकों को अपनाने के अवसरों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
इस अवसर पर खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा, उद्योग निदेशक विशाल सागर, जियाडा एवं जूडको के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
उद्योग जगत की ओर से सीआईआई झारखंड राज्य परिषद के अध्यक्ष एवं वैदेही मोटर्स प्राइवेट लिमिटेडके निदेशक दिलू पारिख, उपाध्यक्ष डीबी सुंदरा रमण तथा टीकेआईएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विवेक भाटिया सहित राज्य की प्रमुख खनन और इस्पात कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
दिलू पारिख ने झारखंड में उद्योग और खनन क्षेत्र की व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं विवेक भाटिया ने महत्वपूर्ण खनिजों, खदानों के आधुनिकीकरण, स्वच्छ तकनीकों और खनन एवं निर्माण उपकरणों के विद्युतीकरण में बढ़ते अवसरों को रेखांकित किया।
बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने उन्नत तकनीकों के तेजी से उपयोग, नीलामी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और स्पष्टता तथा मजबूत सप्लायर नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद झारखंड में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर पैदा होंगे।
————-