रानी अंडर-18 टीम के साथ शानदार काम कर रही हैं : टिम व्हाइट

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भोपाल, 19 मई । भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच टिम व्हाइट ने भारत-ऑस्ट्रेलिया अंडर-18 एक्सपोजर सीरीज़ के दौरान युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन की जमकर तारीफ की। भोपाल में चल रही इस सीरीज़ के दौरान खिलाड़ियों का निरीक्षण करने पहुंचे व्हाइट ने कहा कि अंडर-18 टीम की कोच रानी रामपाल युवा खिलाड़ियों के साथ शानदार काम कर रही हैं।

करीब छह सप्ताह पहले बेंगलुरु में भारतीय अंडर-21 महिला टीम की जिम्मेदारी संभालने वाले व्हाइट ने कहा कि जूनियर और सीनियर स्तर के बीच मजबूत तालमेल बनाना बेहद जरूरी है।

उन्होंने हॉकी इंडिया के हवाले से कहा, “मैं भोपाल आकर अंडर-18 खिलाड़ियों को देखने के लिए बेहद उत्सुक था क्योंकि यही हमारे भविष्य की प्रतिभाओं की सीधी पाइपलाइन है। रानी के साथ मेरी शानदार बातचीत और तालमेल रहा है और वह इस युवा टीम के साथ बेहतरीन काम कर रही हैं।”

व्हाइट ने कहा कि इस टीम में कई 15 और 16 वर्ष की खिलाड़ी हैं, जिनमें शारीरिक और तकनीकी रूप से आगे बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा, “ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले और दूसरे मैच के बीच खिलाड़ियों में जो सुधार और अनुकूलन देखने को मिला, वह काफी उत्साहजनक है। यह सीरीज़ दोनों देशों के लिए खिलाड़ियों के विकास पर केंद्रित है।”

उन्होंने भारतीय हॉकी में अपने शुरुआती अनुभव साझा करते हुए कहा कि हॉकी इंडिया लीग में तमिलनाडु ड्रैगन्स पुरुष टीम के मुख्य कोच के रूप में काम करने से उन्हें भारतीय हॉकी को समझने में मदद मिली।

व्हाइट ने कहा, “पिछले छह सप्ताह काफी व्यस्त रहे, लेकिन हमने शुरुआती चरण में वही हासिल किया जो मैं चाहता था। ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम जैसे देशों में कोचिंग करने के अनुभव के आधार पर मैं मानता हूं कि कोचिंग के मूल सिद्धांत हर जगह समान होते हैं। भाषा की कुछ छोटी बाधाएं हैं, लेकिन हम अनुवाद, व्हाइटबोर्ड और सरल संदेशों की मदद से उन्हें आसानी से दूर कर लेते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरा पहला लक्ष्य भारतीय जूनियर लड़कियों को आधुनिक और अलग शैली की हॉकी खिलाना है, जिससे उनकी पूरी क्षमता सामने आ सके।”

सितंबर में चीन में होने वाले जूनियर महिला एशिया कप को ध्यान में रखते हुए व्हाइट ने कहा कि टीम का लक्ष्य सिर्फ जूनियर स्तर पर पदक जीतना नहीं, बल्कि खिलाड़ियों को सीनियर टीम के लिए तैयार करना है।

उन्होंने कहा, “हमारा अल्पकालिक लक्ष्य सितंबर तक ऐसी मजबूत टीम तैयार करना है जो चीन जैसी एशियाई ताकतों को कड़ी चुनौती दे सके। लेकिन जूनियर कार्यक्रम का असली उद्देश्य खिलाड़ियों में सही आदतें, तकनीकी समझ और खेल शैली विकसित करना है ताकि वे सीनियर टीम में जाकर तुरंत विश्वस्तरीय प्रदर्शन कर सकें।”

यूरोप और भारत के खिलाड़ी विकास मॉडल की तुलना करते हुए व्हाइट ने कहा, “बेल्जियम और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों में खिलाड़ियों का विकास क्लब प्रणाली के जरिए होता है, जबकि भारत में विशाल भौगोलिक क्षेत्र के कारण हॉस्टल और अकादमी आधारित प्रणाली पर ज्यादा निर्भरता है। दोनों प्रणालियों के अपने फायदे हैं। हॉकी इंडिया लीग के अनुभव ने मुझे भारतीय हॉकी के प्रति लोगों के जुनून को तेजी से समझने में मदद की है।”